लाक डाउन के कारण महाजन के कर्ज तले डूबे फूल उत्पादक

 

महाजन से कर्ज लेकर कर रखी थी फूलों की खेती, लॉक डाउन के कारण सब हो गया बर्बाद, किसानों के हाथ सिर पर

वैशाली जिला ब्यूरो प्रभंजन कुमार मिश्रा की रिपोर्ट 

फूलों की खेती जीवन यापन करने वाले किसानों के समक्ष कोरोना वायरस जैसी वैश्विक महामारी ने भूखमरी के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है। जिसके वजह से इन किसानों को दो वक्त की रोटी की भी नसीब नहीं हो पा रही है। फूलों की खेती कर रखें किसानों की पूंजी मारी गई और वह महाजन के कर्जदार भी हो गए। फूलों की खेती करने वाले माली मालाकार समाज के लोगों ने गुरुवार को रोना रोते हुए बताया कि अब उनके घर में फाकाकशी की नौबत आ गई है। किसानों के कर्ज तले दब गए हैं। उनकी खेती लॉक डाउन के कारण मारी गई।

मालूम हो कि महुआ आयनमंडल के प्रखंडो में विभिन्न गांव समसपुरा, चकमजाहिद, मानपुरा, फुलवरिया, सरसई, बाकरपुर, नारायणपुर, बेरई, फतेहपुर आदि अनेकों गांव में कई किसान फूलों की खेती कर अपने जीविकोपार्जन करते थे। वे अपने खेतों से उपजा हुआ फूल पटना, हाजीपुर, मुजफ्फरपुर समेत अन्य शहरों में भेजकर पूंजी कमाते थे।जबकि लॉक डाउन के वजह से उनके फूल खेत में ही सड़-गल रहे है। जिसके वजह से फूलों की खेती करने वाले माली मालाकार परिवारों के समक्ष भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

इस बावत फूलों की खेती करने वाले किसान सुधीर कुमार मालाकार , राजू भगत, रामकुमार भगत, संजीत भगत, विपिन मालाकार, अजय मालाकार, अनिल भगत, अशोक भगत, रामू भगत, शंकर मालाकार ने संयुक्त रूप से बताया कि वे लोग विगत 15 वर्षों से फूलों की खेती कर जीवन यापन करते आ रहे हों। हम लोग अपने खेतों से फूल शादी-विवाह,मंदिर, धार्मिक स्थल,पर्व-त्यौहार में भेज कर परिवार का भरण पोषण करते हैं।

वर्तमान परिवेश में कोरोना महामारी जैसी बीमारी के वजह से लगाए गए लॉकडॉन के कारण हम लोगों की खेती मारी गई। लगन, शादी-विवाह, शुभ कार्य बंद होने से फूलों की बिक्री मंद पर गई और सारे अरमान चूर हो गए। वैशाली जिले के किसानों व खासकर माली समुदाय ने कहा कि इस मामले पर बिहार सरकार एवं कृषि मंत्री को गंभीरता से विचार करना चाहिए। फूलों की खेती कर रहे किसानों ने बताया कि शादी-विवाह, शुभ लग्न, शुभ कार्य, पर्व-त्यौहार, नेताओं का स्वागत, अभिनंदन, चुनाव, पूजा-पाठ, यज्ञ आदि में फूलों की खपत होती है। जबकि लॉक डाउन के कारण सब मारी गई।