वरीय कृषि वैज्ञानिक ने किया प्रमाण – पत्र वितरित

राजू रंजन दुबे बिक्रमगंज रोहतास

बिक्रमगंज । मंगलवार को कृषि विज्ञान केंद्र रोहतास में वर्मी कंपोस्ट उत्पादन पर प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन किया गया। सभी उपस्थित 35 प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण पत्र देकर विदा किया गया। यह तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम दिनांक 13 सितंबर 2020 से शुरू हुआ था । जिसमें जिला प्रोग्राम ऑफिसर मनरेगा द्वारा चयनित प्रशिक्षणार्थियों को शामिल किया गया था। इन प्रशिक्षणार्थियों में से सभी के यहां मनरेगा द्वारा पशुपालन शेड बनवाया गया है । जिसमें वह पशुपालन करेंगे। सरकार की यह योजना है कि उन्हें गोबर से वर्मी कंपोस्ट बनाने की प्रक्रिया की जानकारी दी जाए ताकि इसका इस्तेमाल बृहद पैमाने पर रोहतास जिले में किया जा सके। प्रशिक्षणार्थियों में आकाश कुशवाहा, चंदन राय, मनीष राय, विजय कुमार राय, माधव जी, हरेंद्र कुमार, बैजनाथ शर्मा, शारदानंद राय, भीम पाल, सीमा देवी, किरण देवी, पिंटू पाल इत्यादि सहित कुल 35 लोगों ने भाग लिया। प्रशिक्षण में मौजूद वरीय वैज्ञानिक डॉ रामपाल ने बताया कि भूमि की उर्वरा शक्ति के रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल के कारण खराब हो रही है जिसे सिर्फ जैविक उर्वरकों के इस्तेमाल के द्वारा ही संरक्षित किया जा सकता है। जैविक उर्वरक का उत्पादन लोगों को बढ़ाना चाहिए इसमें पोषक तत्वों की मात्रा गोबर से डेढ़ गुना ज्यादा होती है। मत्स्य वैज्ञानिक श्री आरके जलज ने केंचुआ खाद के निर्माण की विधि के बारे में बताया। उन्होंने केंचुआ की दो प्रजातियां एसीना फोटिडा एवं यूडलीस यूजिनी का जिक्र किया जो गोबर से वर्मी कंपोस्ट बनाने में प्रयोग में लाई जाती हैं। उन्होंने इसमें मिलने वाले सरकारी अनुदान की भी चर्चा की। कार्यक्रम में मौजूद डॉ रतन कुमार ने केंचुआ खाद निर्माण के बारे में बताया कि गोबर एवं अन्य कूड़े कृषि सामग्री इत्यादि बराबर मात्रा में टंकी में डालकर केंचुए के साथ विघटन हेतु छोड़ दिया जाता है पचास से 60 दिनों बाद उसमें वर्मी कंपोस्ट तैयार हो जाता है ।