हर चुनाव में विभिन्न नेता ने किया शिवहर जिला के विकास का दावा परंतु विकास रहा कोसों दूर कब पूरा होगा रेल लाइन का सपना जनता मांग रही है जवाब

शिवहर ब्यूरो अरुण कुमार साह की रिपोर्ट

    एक नजर जिला के विभिन्न समस्या पर

SHEOHAR : जिला शिवहर तिरहुत प्रमंडल का एक एतिहासिक जिला है | जिला बनने से पहले यह सीतामढ़ी जिला का अनुमंडल था .यह सीतामढ़ी से 06-10-1994 में अलग हुआ |शिवहर जिला 1991 जनगणना के अनुसार सीतामढ़ी जिला का अनुमंडल था | 6 अक्टूबर 1994 को शिवहर एक जिला के रूप में आया |तिरहुत प्रमंडल के उत्तरी भाग में यह अवस्थित है और बिहार के सबसे उत्तरी भाग में अवस्थित है |यह बाढ़ से प्रभावित क्षेत्र है |बाढ़ का मुख्य कारण बागमती और बूढी गंडक नदी है |देकुली यहाँ की पवित्र स्थल है |2011 के जनगणना के अनुसार शेखपुरा के बाद सबसे कम आवादी वाला जिला शिवहर है |यह जिला तीन जिला से घिरा हुआ है | उत्तर और पूर्व दिशा में सीतामढ़ी ,पश्चिम में पूर्वी चम्पारण और दक्षिण में मुजफ्फरपुर|

इस चुनाव में 4 दशकों तक रघुनाथ झा के नाम रहे शिवहर का दिल कौन जीतेगा

रघुनाथ झा लगातार 6 बार शिवहर ऐसेमली से विधायक रहे और 2 बार क्रमशः गोपालगंज और बेतिया से लोकसभा के लिए भी चुने गए. पिछले 2 विधानसभा चुनावों में यह सीट जेडी यू के पास चली गई बिहार के राजनीतिक इतिहास में शिवहर का नाम रघुनाथ झा की धरती के रूप में दर्ज हो चुका है. रघुनाथ झा करीब 4 दशक तक यहां से कभी सांसद और कभी विधायक बनते रहे. दरअसल शिवहर जिले में स्थित शिवहर नाम से लोकसभा और विधानसभा दोनों की सीटें हैं. रघुनाथ झा लगातार 6 बार शिवहर से विधायक रहे और 2 बार क्रमशः गोपालगंज और बेतिया से लोकसभा के लिए भी चुने गए. वे बिहार सरकार में कई विभागों के मंत्री भी रहे और केंद्र में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार में भारी उद्योग राज्यमंत्री भी बनाए गए. पिछले 2 विधानसभा चुनावों में यह सीट जेडी यू के पास चली गई थी, अब देखना है कि रघुनाथ झा की विरासत कौन दल संभालता है 1972 से 2010 तक झा परिवार के पास ही रही सीट रघुनाथ झा शिवहर से पहली बार 1972 में कांग्रेस के टिकट पर चुने गए थे. जनता ने उन्हें 3 बार कांग्रेस के टिकट पर चुना. बिहार में कांग्रेस की हालत खराब होती गई और वे जनता दल में शामिल हो गए. रघुनाथ जनता दल के गठन के बाद उसके प्रथम प्रदेश अध्यक्ष भी बने. अपनी लोकप्रियता और राजनीतिक कौशल के चलते वे पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की पार्टी समाजवादी जनता पार्टी (सजपा) और समता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बने. बताया जाता है कि 1990 में लालू प्रसाद यादव को बिहार का मुख्यमंत्री बनाने में उनकी अहम भूमिका थी. रघुनाथ झा के बेटे अजित कुमार झा को भी 2 बार इस क्षेत्र के लोगो ने विधायक बनाकर विधानसभा भेजा.2000 के बाद के विधानसभा चुनाव पर नजर डाले तो 2000 के चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल के सत्य नारायण प्रसाद ने समता पार्टी के अजित कुमार झा को हराया था. फरवरी 2005 के चुनाव में अजित कुमार झा राष्ट्रीय जनता दल के टिकट पर चुनाव लड़े और जीत हासिल की. अक्टूबर 2005 में एक बार फिर हुए विधानसभा चुनाव में अजित कुमार झा को दूसरी बार जीत हासिल हुई. लेकिन 2010 के चुनाव में परिणाम बदल गया और जनता दल यूनाइटेड के शरफुद्दीन को जीत मिली. बहुजन समाज पार्टी की प्रतिमा देवी दूसरे स्थान पर रही थीं. जबकि लगातार 2 बार से विधायक चुने गए अजित कुमार झा तीसरे स्थान पर रहे. अजित राष्ट्रीय जनता दल के टिकट पर चुनाव लड़े थे. 2015 के चुनाव में मुकाबला त्रिकोणीय हो गया और शरफुद्दीन को बहुत कम वोटों से जीत हासिल हो सकी. उन्होंने हिंदुस्तानी अवामी मोर्चा की प्रत्याशी लवली आनंद को महज 461 वोटों से हराया. रघुनाथ झा के बेटे अजीत कुमार झा को इस चुनाव में चौथे स्थान पर संतोष करना पड़ा. तीसरे स्थान पर निर्दलीय प्रत्याशी रत्ना ठाकुर रहीं.

जिला के मुख्य समस्याएं जिसके लिए विभिन्न दलों के नेता वादा करते हैं परंतु पूरा नहीं करते हैं

शिवहर कब शुरू होगा रेल लाइन का निर्माण, जवाब मांग रही है जनता

शिवहर वर्ष 2007 में स्वीकृत बापूधाम मोतिहारी सीतामढ़ी भाया शिवहर रेल लाइन का काम अभी तक शुरू नहीं हो सका है. जिसको लेकर शिवहर के लोगों में क्षोभ व्याप्त रहा है गौरतलब है कि 2007 वर्ष में रेल लाइन को मोतिहारी से शिवहर होते हुए सीतामढ़ी सें जोड़ने का वर्षों का इंतजार पूरा होने से एक उम्मीद जगी थी, लेकिन करीब 13 साल बाद भी रेल लाइन का कार्य शुरू नहीं हो पाया है. जिससे लोगों का रेल से सफर करने का सपना टूटता नजर आने लगा है. ग्रामीणों की माने तो विगत 13 वर्षों में केवल सर्वे का कार्य हुआ है.लेकिन जानकार कहते है अब नये सर्वे का जरूरत पड़ेगा .बताते चलें कि 2007 में जब इस रेल परियोजना की स्वीकृति दी गयी.इससे जिला के व्यावसायिक क्षेत्र में आगे बढ़ने के साथ यहां रोजगार के अवसर बढने, राज्य के अन्य हिस्सों से जुड़ने और पर्यटन को पंख लगने के उम्मीद जगी. किंतु अभी तक जनप्रतिनिधि या सरकार शिवहर के लोगों के उम्मीद पर खड़ी नहीं हो सकी है. शिवहर जिले में रेल सुविधाओं को लेकर जिलावासियों द्वारा पिछले लंबे समय से मांग की जा रही है.पर्यटन व उद्योग धंधों के लिहाज से विकास कर रहे शिवहर जिले में अगर रेल सेवाएं हो तो जिला विकास के नये आयामों को छू सकता है.हालांकि केंद्र सरकार और स्थानीय सांसद एक ही पार्टी के होने से उम्मीद जगी है. सांसद रमा देवी बार बार आश्वासन देती है शिवहर जिला कि वास्तविक प्रगति तभी संभव है. जब इस राज्य के कोने कोने को रेल यातायात से जोड़ दिया जाए. आज भी शिवहर के लोगों को बस में धक्के खाने पड़ते है. बस से सफर में महिलाओं का काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता हैं. एक तरफ जहां देश में बुलेट ट्रेन आदि निकालने की बातें हो रही हैं. तो दूसरी तरफ आलम ये है कि देश के कई कोने साधारण रेल से भी नहीं जुड़ पाया है|


नेताओं के लिए अपनी कहानी बयां करती है शिवहर जिला के कीचड़ एवं धूल उड़ते सड़क

शिवहर जिला की मुख्य सड़कें
शिवहर जिसे नवोदित एवं सबसे छोटा जिला की संज्ञा प्राप्त है, विकास से कोसों दूर है। विकास के लिए सबसे अहम है सड़क संपर्क की सुविधा जिसमें यह जिला आज भी फिसड्डी साबित हो रहा है। पड़ोस के तीन जिलों क्रमश: सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर एवं पूर्वी चंपारण के मुख्यालय मोतिहारी से सीधा सड़क संपर्क नहीं है। ऐसा नहीं है कि सड़कें नहीं हैं, आवागमन दुरुह है। शिवहर-मुजफ्फरपुर पथ चौड़ीकरण कार्य को लेकर जगह-जगह परेशानी का सबब बना है तो शिवहर-मोतिहारी पथ में बेलवा घाट स्थित तीन किलोमीटर का कभी खत्म नहीं होने वाला दर्द अब तक ठीक नहीं हुआ है हालांकि इसे एसएच 54 का दर्जा हासिल है।वहीं सबसे बदतर स्थिति है शिवहर के मातृजिला सीतामढ़ी पथ की जहां बागमती नदी के दोनों तटबंधों के बीच की एनएच 104 की हालत ऐसी है कि जो कोई भी एक बार इस सड़क से गुजरता है वह फिर दुबारा आने से डरता है। अगर भूल से आ भी गया तो तो उस होकर लौटने के बजाए रास्ता बदलकर जाना पड़ता है पिपराही-पुरनहिया-बसंतपट्टी होकर जाने में ही अपनी भलाई समझता है। वजह से रुबरु हो लें कि दोनों ही तटबंधों के बीच वर्षों से सड़क नहीं बन सकी है जबकि इसे प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने की जरूरत है। बाढ़ में पूरा सड़क बागमती की भेंट चढ जाता है। सबसे बड़ी परेशानी उन दिनों होती है उड़ते धूल से हर आने-जाने वाले का हुलिया बिगड़ जाता है। वहीं यह सड़क वाहन चालकों के ड्राइविग कौशल की परीक्षा ले रही है। नजारा तब देखने लायक होता है जब कोई बड़ी गाड़ी बगल से गुजरती है, फिर क्या सामने धूल के सिवा कुछ भी तो दिखाई ही नहीं देता है। वहीं दुर्घटना होना तो यहां के लिए आम बात है।