फिर चहकेगी गौरेया,ची ची से होगी सुबह की आगाज़

 

नालंदा संवाददाता

अब वे दिन दूर नहीं जब ची ची की मधुर संगीत से सुबह की आगाज़ होगी। हमारे घर-आँगन में फिर से चहकेगी गौरैया। विगत 15-20 वर्षों से अंधाधुंध आधुनिकीकरण और अंतहीन विकास के कारण हमारा पर्यावरण का संतुलन बिगड़ चूका है। जिसके कारण गौरैये की तादात में भारी कमी देखी जा रही है। इसे संरक्षण व संवर्द्धन के लिए नालंदा जिले में गौरैया संरक्षण अभियान चलाया जा रहा है जिसे आगे राज्य स्तर पर चलाया जाना है। इसके मिशन-2,500 चलाया जा रहा है। यानि इतने घोंसले लगाया जाना है आगामी 20 मार्च तक। ये बातें आज रहुई प्रखंड के भागन बिगहा में आयोजित कार्यक्रम में लोगों को संबोधित करते हुए अभियान के संचालक राजीव रंजन पाण्डेय ने कही।

वही शिक्षक रितेश कुमार सिंह ने कहा कि हमसब ग्रामीण इस बात से खुश हैं कि इस पहल की शुरुआत हमारे जिले से हुई है। गौरैया हमारी परिवार और संस्कृति कि अहम हिस्सा थी। लेकिन जीवन में हो रहे व्यापक बदलाव के कारण अब गांव-शहर में मुश्किल से दिखाई देती है। आज हमारे गांव में गौरैये के संरक्षण के लिए 20 घोंसले लगाए जा रहे हैं जो इनकी आबादी को बढ़ने में कारगर साबित होगी।

इस मौके पर भोला पासवान,रवि रंजन पाण्डेय,संतोष कुमार,मनोज पाण्डेय,विशुन देव प्रसाद,राजू कुमार,विजय कुमार,सूर्यमणि पासवान,रितेश कुमार सिंह,अमरजीत कुमार,शैलेन्द्र कुमार के अलावे अन्य लोग मौजूद थे।