रोगी प्रतिक्षालय बना जैव चिकित्सा अवशिष्ट भंडारण, पीपीई कीट सहित अन्य समान फेंके गयें

रिपोर्ट अक्षय कुमार आनंद

मैनाटाड़: कोविड-19 के संक्रमण से बचाव के लिए देश-दुनिया लगी हुई है। अस्पतालों से लेकर पंचायतों तक अपने अपने स्तर से सुरक्षात्मक उपाय किए जा रहे हैं। वायरस का संक्रमण का लक्षण देखने पर अस्पतालों द्वारा वैसे व्यक्तियों का सैंपल भी जांच के लिए लिया जा रहा है। लेकिन इस जांच में पर्सनल प्रोटक्शन कीट का उपयोग कर पुनः नष्ट करने या डिस्ट्रॉय करने वाले एजेंसी को सौंपने के बजाय उसे जैसे तैसे पुराने अस्पताल परिसर में फेंक दिया जा रहा है। इससे लोगों में भय का आलम है। और इस लापरवाही के विरोध में लोगों में गुस्सा भी है। यहां बता दें कि स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा प्रखंड मुख्यालय स्थित पुराने अस्पताल परिसर में नवाचारी निधि से बने रोगी प्रतीक्षालय में जैव चिकित्सा अवशिष्ठ भंडार बना दिया गया है। इसमें स्वास्थ्य कर्मियों के लिए बनाए गए पर्सनल प्रोडक्शन कीट, मास्क, ग्लबस आदि का उपयोग करने के बाद कर्मियों द्वारा यहां रखना था । लेकिन वह उपयोग किया गया किट अस्पताल परिसर के बाहर यत्र तत्र फैला हुआ है। रोगी कल्याण समिति सदस्य अशोक कुमार राम, अक्षय कुमार आनंद आदि ने बताया कि उपयोग कर फेंके गए किट से संक्रमण फैलने की प्रबल संभावना बनती है।

सूत्रों की माने तो प्लासेंटा व अन्य को डिस्ट्रॉय करने के लिए मुजफ्फरपुर एजेंसी को यह कार्य दिया गया है। वह प्लेसेंटा को ले जाकर डिस्प्ले करता है। लेकिन यह केवल कागजों में होता है। इस संबंध में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ विजय कुमार चौधरी ने बताया कि पर्सनल प्रोडक्शन कीट को डिस्ट्रॉय करने हेतु एक अलग स्थान पर रखना है। अगर वह झाड़ी में फेंका हुआ है। वह गलत है। उसे अविलंब स्वास्थ्य प्रबंधक को निर्देश दिया जाता है उसे हटाकर किसी सुरक्षित जगह रखें।