कैमूर में भक्त और भगवान के बीच कोरोना वायरस के कारण पहली बार चैत्र नवरात्रि में मां मुंडेश्वरी धाम से लेकर जिले के सभी मंदिरों को रखा गया बंद

चैत्र नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की हुई आराधना , श्रद्धालुओं के द्वारा मंदिरों के सिंधियों पर टेका गया माथा

भभुआ से आशुतोष कुमार सिंह

कैमूर( भभुआ ) बुधवार को चैत्र नवरात्र और हिंदु नववर्ष का शुभारंभ हुआ । इतिहास में संभवतः पहला ही मौका होगा जब जिला में मां मुंडेश्वरी धाम से लेकर जिले के सभी प्रखंडों में माता का मंदिर नवरात्र में भक्तों के लिए बंद रहें । मंदिरों में नवरात्र की सारी विधियां और पूजन तो हुई । लेकिन भक्तों के दर्शन पूजन करने पर पाबंदी रही । कोरोना वायरस के चलते मंदिर आम लोगों के लिए बंद रहा , सिर्फ पंडे-पुजारियों को ही मंदिरों में प्रवेश की इजाजत मिली ।

ऐसे में चैत्र नवरात्र के पहले दिन ही श्रद्धालुओं को निराश होना पड़ा। बताते चलें कि नवरात्र के पहले दिन लोगों के द्वारा घरों में ही कलश स्थापना की गई भक्तों ने मां के दरबार में प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की विधि विधान के साथ पूजा अर्चना की वही लाँक डाउन के चलते श्रद्धालुओं को मंदिरों के सीढ़ियों पर माथा टेक कर संतोष करना पड़ा। इस संदर्भ में समाजसेवी मिलन सिंह एवं आशुतोष कुमार सिंह ने परिधि समाचार संवाददाता को बताया कि हमारे हिंदू धर्म में साल में दो बार नवरात्र महीना मे लोग 9 दिनों तक मां की आराधना में लीन हो जाते हैं। लेकिन कोरोना वायरस को लेकर सरकार के विशेष गाइडलाइन का अनुसरण करते हुए श्रद्धालु अबकी बार अपने अपने घरों में ही मां की आराधना में लीन है। इसके बावजूद भी श्रद्धालुओं के द्वारा माता के मंदिर के सीढ़ियों पर माथा टेक कर अटूट आस्था एवं विश्वास के साथ मनोकामनाएं पूर्ण होने की आराधना की गई एवं साथी साथ श्रद्धालुओं के द्वारा कोरोना जैसे महामारी से निजात पाने की स्तुति की गई।

बबुआ में देवी मां का मंदिर मोहनिया में सती मां का मंदिर एवं रामगढ़ में दुर्गा चौक पर दुर्गा माता का मंदिर एवं गोड़सरा सूर्य सरोवर धाम पर मां दुर्गा मंदिर एवं रामगढ़ में मां काली के मंदिर सहित सभी मंदिरों पर श्रद्धालुओं को बाहर से ही दर्शन करना पड़ा।