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शिक्षा का महान् केन्द्र रहा है पाटलिपुत्र। विषय -- संस्कृत (द्वितीय पाठ- पाटलिपुत्रवैभवम्)


शिक्षा का महान् केन्द्र रहा है पाटलिपुत्र। 

 गंगा के पावनी तट पर स्थित बिहार की राजधानी पाटलिपुत्र का इतिहास ढाई हजार वर्षों का हैं।धार्मिक, राजनीतिक और औद्योगिक क्षेत्र में विशेष ध्यान आकर्षित करनेवाले पाटलिपुत्र के वैभव का वर्णन विदेशी यात्रियों- मेगास्थनीज, ह्वेनसांग, फाह्यान, इत्सिंग इत्यादि ने अपने संस्मरण ग्रथों में किया हैं।

             दामोदर गुप्त ने अपने काव्य कुट्टनीमतम् में कहा है कि इन्द्रपुरी को परिभूत करनेवाला सरस्वती का कुलगृह पाटलिपुत्र प्राचीनकाल से ही शिक्षा का महान् केन्द्र रहा है।वही दूसरी ओर राजशेखर ने अपने ग्रंथ काव्यमीमांसा में कहा है कि इसी नगर(पाटलिपुत्र)से उपवर्ष, पाणिनि, पिंगल, व्याडि, वररूचि और पतंजलि इत्यादि महान् विद्वानों ने ख्याति अर्जित की।

          संस्कृत ग्रंथों में पाटलिपुत्र का अन्य नाम कुसुमपुर या पुष्पपुर प्राप्त होता हैं।यहाँ संग्रहालय, तारामंडल, उच्च न्यायालय, जैविक उद्यान, गोलघर, पालिका देवी पटनदेवी, गुरुद्वारा एवं महावीर मंदिर इत्यादि दर्शनीय स्थल हैं।


विषय -- संस्कृत (द्वितीय पाठ- पाटलिपुत्रवैभवम्)

           भाग--01


           "सृजनधारा की प्रस्तुति"




सार-संग्रह


1.पाटलिपुत्र नदी के किनारे अवस्थित है -- गंगा नदी।

2.काव्य मीमांसा नामक ग्रंथ के रचयिता हैं- राजशेखर

3.कौमुदी महोत्सव मनाया जाता था -- शरद् ऋतु में।

4.पटना का इतिहास पुराना है -- 2500 वर्ष।

5.कुट्टनीमतम् काव्य की रचना की हैं-- दामोदर गुप्त ने।

6.यूनान का राजदूत जो भारत आया था -- मेगास्थनीज।

7.पाटलिपुत्र पटना के नाम से प्रसिद्ध हुआ -- मध्यकाल में।

8.सरस्वती का कुलगृह कौन-सा महानगर था -- पाटलिपुत्र।

9.पाटलिपुत्र की पालिका देवी हैं -- पटनदेवी।

10. मेगास्थनीज पटना किसके समय में आया था -- चन्द्रगुप्त मौर्य के।

11.पाटलपुष्पों की पुत्तलिका रचना के आधार पर पटना का नाम पडा -- पाटलिपुत्र।


           डा० सुशील नारायण तिवारी

                       प्राचार्य

 बी०डी०बी०उच्च विद्यालय सह इंटर कॉलेज, पचबेनिया, सीवान

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