Breaking News

खेतों में जल जमाव होने से धान उत्पादक किसान पसोपेश में

इस बार ऊपरी भूमि पढ़ भी जलजमाव के कारण बहुत कम किसान ही कर पाएंगे धान की रोपनी


वैशाली जिला ब्यूरो प्रभंजन कुमार मिश्रा की रिपोर्ट 

बारिश के कारण इलाका जलजमाव से घिरा हुआ है। निचले इलाके में तो जलजमाव के कारण समुद्र सा नजारा बना हुआ है। जबकि ऊपरी भूमि पर भी अधिकतर स्थानों पर जलजमाव बना हुआ है। इससे इस बार 5 फ़ीसदी किसान ही धान की रोपनी कर पाएंगे। 

यहां किसानों ने अपने जल मग्न भूमि को दिखाते हुए बताया कि जहां धान की खेती बड़े पैमाने पर होती है वह चवर पूरी तरह जलजमाव से झील में परिणत है। यहां धान उत्पादक क्षेत्र समसपुरा, सिंघाड़ा, हरपुर बेलवा, सलखनी, डभैच, ओस्ती, हरपुर, मिर्जानगर, कड़ियों, ताजपुर बुजुर्ग, बरियारपुर, सरसई, मुकुंदपुर, पताढ, अकरणपुर, बोअरिया, असोई, महादेवमठ, कन्हौली, धनराज, पानापुर, बिशनपुरा, प्रेमराज, मानपुरा, गरजौल, पहाड़पुर, कुतुबपुर, गोविंदपुर भरतपुर आदि का चवराहा इलाका पूरी तरह जलजमाव से झील बना हुआ है। किसान बताते हैं कि उनके खेत पानी से इस कदर झील बने हैं की वाह समुद्र जैसा दिखता है। किसी के खेत के मेढ का पता नहीं चलता। खेत में 5 से 10 फीट पानी जमा हुआ है। उसमें धान की रोपनी नहीं हो सकती। किसान बताते हैं कि अब तो अगली फसल रबी की भी बुवाई पर आफत होगी। 

महुआ प्रखंड धान फसल पर एक नजर:-

महुआ प्रखंड में 3000 हेक्टेयर भूमि पर होती है धान की खेती।

किसान चौराहा क्षेत्र में अधिकतर करते हैं धान की रोपनी। 

कुछ किसान अपनी भूमि पर भी लगाते हैं धान की फसल।

 इस बार अधिकतर उपरी इलाका में भी जलजमाव से खेती हो रहा चौपट।

महुआ प्रखंड के किसान अपनी भूमि पर करते हैं किराना में तंबाकू, आलू, प्याज, हरी सब्जी की खेती।

कोई टिप्पणी नहीं

Type you comments here!