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पेट्रोल डीजल से लेकर सब्जियों तक की महंगाई से मध्यम वर्गीय परिवार के लोगों की टूटी कमर

वैशाली जिला ब्यूरो प्रभंजन कुमार मिश्रा एवं नवीन कुमार सिंह की रिपोर्ट

सहदेई बुजुर्ग/महनार - पेट्रोल-डीजल से लेकर सब्जियों तक कि महंगाई ने मध्यम वर्गीय परिवार की आर्थिक स्थिति की कमर तोड़ कर रख दी है।धीरे-धीरे लोगों की थालियों से हरि सब्जी गायब होती चली जा रही है।

एक ओर कोरोना के कहर के कारण मध्यम वर्ग एवं गरीब परिवारों की आर्थिक स्थिति बहुत ही खराब चल रही है।कोरोना ने रोजगार को बर्बाद कर उसे तहस-नहस कर दिया।मध्यम एवं गरीब वर्ग के लिये अभी हालात आमदनी अठन्नी खर्चा रुपैया बाली हो गई है।महनार में पेट्रोल 103.83 एवं डीजल 95.61 रुपया प्रति लीटर बिक रहा है।डीजल के दाम में वृद्धि के कारण टेंपो आदि की यात्री किराए में वृद्धि कर दी गई है।जिससे प्रतिदिन आने-जाने वाले लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।वहीं माल ढुलाई का की लागत भी इस महंगाई का असर पड़ रहा है।

इससे भी खाने-पीने की चीजों सहित सब्जी आदि के दाम लगातार बढ़ रहे हैं।हरी सब्जियों के दामों में बेतहाशा वृद्धि के कारण लोगों की थालियों से हरी सब्जी गायब हो रही है।कोई भी हरी सब्जी ₹30 किलो से नीचे नहीं है। वहीं सदाबहार सब्जी माने जाने वाले आलू का दाम भी आसमान छू रहा है। लगातार हो रही वर्षा ने भी हरी सब्जियों के दाम में बढ़ोतरी का एक कारण माना जा रहा है। लगातार हो रही वर्षा के कारण सब्जियों की खेती बहुत बुरी तरह प्रभावित हुई।इससे किसानों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा है।

टमाटर 40 रुपये,परवल 35 से 40 रुपये,भिंडी 35 से 40 रुपये किलो बिक रहा है।सरसों तेल की कीमत पहले ही आसमान छू रही थी ऊपर से सब हरी सब्जियों आदि के दामों में वृद्धि ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है।इस महंगाई की सबसे अधिक मार मध्यम एवं गरीब वर्ग के लोगों पर पड़ रहा है।इसके अलावा घरेलू गैस उपभोक्ताओं के लिए एक गैस सिलेंडर गैस की खरीद भी मुश्किलें पैदा कर रही है।एक सिलेंडर गैस की कीमत लगभग 900 रुपये हो गई है।

जिससे लोगों को परेशानी हो रही है।सरकार ने उज्ज्वला योजना के तहत मुफ्त में गैस कनेक्शन उपलब्ध करा दिया।लेकिन गैस सिलेंडर के दामों में बेतहाशा वृद्धि ने लोगों को परेशान कर रखा है।आलम यह है कि घर में यदि खाने पीने की चीजें खरीदी जाए तो गैस सिलेंडर का दाम जुटाना एक सामान्य परिवार के लिए मुश्किल हो रहा है।जिससे लोग एक बार पुनः पारंपरिक चूल्हे की ओर मुखातिब होने लगे हैं।

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