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दबंग प्रधानों के खिलाफ जनता को कार्रवाई के नाम पर मिले सिर्फ झूठे आश्वासन कहां गई शौचालय में घोटालों की जांच।

अक्सर प्रधान बने कुछ तो दबंगई के बल पर तो कुछ सत्ता के बल पर क्योंकि उन्नाव जिले में अक्सर सत्ता धारियों का रहता है हमेशा दबदबा


उन्नाव से जिला ब्यूरो चीफ अवधेश कुमार की रिपोर्ट

देखिए f 84 राजेपुर ग्रांड के समुदाय शौचालय का हाल जर्जर पड़ा शौचालय भवन कैसे बहा रहा है गरीब जनता की किस्मत को आंसू। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में बैठे अधिकारियों का उन्नाव जिले में अक्सर जनता को ग्राम पंचायतों में हुए शौचालय घोटाले गबन में मिलता रहा जांच के नाम पर झूठा आश्वासन

विकास की आड़ में उन्नाव जिले की अक्सर ग्राम पंचायतों में फैली रही भ्रष्टाचार की जड़ें

शौचालय निर्माण में ग्राम प्रधान की धांधली, लाभार्थियों को नहीं मिला धन प्रधानों को मिलता है अक्सर नेताओं का संरक्षण क्योंकि प्रधानों द्वारा किया गया था अक्सर ग्राम पंचायतों में कई कई लाखों से लेकर करोड़ों का घोटाला लेकिन जांच के नाम पर पढ़ गया पर्दा।

शौचालय निर्माण में ग्राम प्रधान व ग्राम सचिव जमकर धांधली कर रहे हैं। गरीबों को शौचालयों का लाभ नहीं मिल रहा है। केंद्र व यूपी की सरकारें स्वच्छ भारत महाभियान के लाख दावे करें। किंतु यह योजना भ्रष्टाचार के चलते धरातल पर दम तोड़ चुकी है।

बता दें जनपद उन्नाव के अक्सर विकासखंड के गांव मुर्रा जहां पर शौचालयों का निर्माण कागजों पर तो करवाया गया है। किंतु धरातल पर अधिकांश अधूरे पड़े हैं। किसी में सीट नहीं तो किसी के दरवाजे आदि नहीं है। और किसी की रेडीमेड सवीरेज पटरे निकाल नालियों में इस्तेमाल कर दिए गए वही कई ग्राम पंचायतों में ढाई सौ की शौचालय की जगह पर 50 भी मानक में नहीं।


यह धांधली देख प्रशासन ने सीधे लाभार्थी को दो किस्तों में 12000 रुपए देकर शौचालय का निर्माण कराने का आदेश किया गया तो प्रधानों को आदेश नागवार लगा और जिन लाभार्थियों ने अपने गड्ढा खोदकर बनाना चालू कर दिया।

जिनको 5 वर्ष बीतने के बाद भी उन लाभार्थियों को ग्राम प्रधान और ग्राम सचिव ने पैसा आज तक नहीं दिया और उनके शौचालय आज तक अधूरे पड़े हैं। जबकि शौचालय निर्माण पर सरकार करोड़ों रूपय लुटा रही और धरातल पर कुछ नहीं दिखता।

वहीं प्राथमिक विद्यालयों की बात करें तो जहां पर मॉडल शौचालय बनाने का आदेश शासन द्वारा किया गया वहां भी शौचालयों का निर्माण सिर्फ कागजों पर ही होता दिखाई दे रहा है।

जिन मॉडल शौचालयों के निर्माण पर ग्राम प्रधानों व ग्राम सचिवों ने सरकारी धन का बंदर बांट कर अपनी जेबों में भरकर इस अभियान को पलीता लगा दिया।

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