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रोज रोज हो रही बारिश से बाढ़ की स्थिति और विकराल होती जा रही है।


वैशाली जिला ब्यूरो प्रभंजन कुमार मिश्रा की रिपोर्ट

यहां बरसाती वाया नदी तो खतरे के निशान से काफी ऊपर बह रही है। यह ओवरफ्लो होकर कई गावों को जलमग्न कर चुकी है। जबकि इसी बीच हो रही बारिश से बाढ़ की स्थिति और विकट होती जा रही है। इससे लोगों में भारी परेशानी और जिल्लत की जिंदगी जी रहे हैं।

क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति से लोग काफी परेशान रहे। यहा विभिन्न गांवों में बाढ़ पीड़ितों ने समस्या को सुनाते हुए कहा कि अब तो उनके सामने विकट परिस्थिति खड़ी है। घर में तो पानी भरा हुआ है ही किचन से लेकर शौचालय तक पानी से उपलाया हुआ है। उन्होंने समस्या को सुनाते हुए कहा कि इस समय भोजन से ज्यादा परेशानी शौच जाने की हो रही है। चारों तरफ जलमग्न है। कहीं भी खाली जगह नहीं। घर में शौचालय पानी से भरे हुए हैं। वे लोग शौच के लिए जाएं तो कहां जाएं। यह बहुत ही विकट स्थिति बनी हुई है। लोगों ने बताया कि वाया नदी ओवरफ्लो होकर कई गांवों को जलमग्न कर चुकी है। इसी बीच रोज-रोज हो रही बारिश उसे और विकराल कर रही है। महुआ के चांदसराय, पकड़ी, गोरीगामा, कढनिया, सिंहराय पश्चिमी, छतवारा, कुशहर, डगरू, परमानंदपुर, मकसूदपुर, सिंघाड़ा, रामपुर मेघपुर, बीरपुर, मुकुंदपुर नीलकंठ पुर आदि गांव नदी के ओवरफ्लो होने से जलमग्न हो चुके हैं। यहां डगरु, परमानंदपुर, सिंघाड़ा आदि स्थानों पर बांध टूट जाने के कारण भी कई गांव में बाढ़ का पानी फैल गया है। बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि उन्हें सरकारी तौर पर कोई सहायता मुहैया नहीं हो रही है। वे लोग काफी कष्ट में जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

महुआ के गांव नगर जल जमाव के चपेट में:

महुआ। महुआ के बाया नदी के तटीय इलाका ही नहीं आसपास के गांव जलजमाव के चपेट में है। यहां तक की नगर परिषद का अधिकतर भाग जलजमाव से भरे होने के कारण लोगों की जिंदगी भारी कष्ट में बीत रही है। यहां नगर परिषद का एक बड़ा इलाका वार्ड संख्या 09 लंबे समय से जलजमाव के चपेट में है। यहां तो लोगों ने बताया कि अब तो कई कच्चे मकानों के नींब हिलने लगी है। जिससे डर बना हुआ है कहीं वह धराशाई ना हो जाए। यहां बहुत से ऐसे मकान हैं जो कच्चे तौर पर बनाए गए हैं। जहां लंबे समय से जलजमाव के कारण वह जमींदोज हो सकता है। इधर घाघरा नहर के बांध टूटे होने से दर्जनों गांव जलमग्न हो चुके हैं। घागरा नहर पताढ में लंबे समय से टूटी हुई है। इसका पानी पताढ से लेकर बिशनपुरा, महादेव मठ, कन्हौली, धनराज, अकरणपुर, दोहजी, डुमरी, पानापुर, बिलंदपुर, करियो, ताजपुर बुजुर्ग, बेझा, कल्याणपुर, फरीदपुर आदि दर्जनों गांव इसके पानी से जलमग्न हो चुके हैं। सबसे बड़ी समस्या किसानों को है। यहां 90 फ़ीसदी भूभाग जलजमाव के चपेट में होने से किसानों की खेती मारी जा रही है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि किसान परिवार का आगे जीवन कैसे चलेगा।

बाढ़ ग्रस्त इलाके में मवेशियों की को भारी परेशानी:

महुआ। बाढ़ ग्रस्त इलाके में मवेशियों को भारी परेशानी हो रही है। उन्हें चारा की दिक्कत से भोजन नहीं मिल रहा है। पशुपालक परेशानी में है कि करें तो क्या करें। उनके मवेशी बगैर भोजन के रह रहे हैं। जिसके कारण उन्हें चिंता बनी हुई है। इस परिस्थिति में भी किसान चारा काट कर लाते हैं और किसी तरह मवेशियों को आधे पेट खिलाकर उसे जिंदा रख रहे हैं। किसानों ने बताया कि मवेशियों को भरपेट भोजन नहीं मिलने कारण उसे दूध कम गई है। 

इसी में पशु चारे की कीमत भी आसमान छू रही है। किसान परिवार भूसा खरीदने में असमर्थ हैं। ऊंचे दाम में भूसा खरीद कर पशुओं की खिलाना उनके बस की बात नहीं है। जिस कारण वे उसे चराने के लिए दूर लेकर जाते हैं। इस समय पशुपालक अपने पशुओं को बचाने के लिए 10 से 20 किलोमीटर दूर ले जाकर ऊपरी क्षेत्र में चराकर जीवन बचा रहे हैं। किसान कहीं भी पशुओं को लेकर समय काट रहे हैं। इधर कड़ियों में तो सड़क पर 3 फीट पानी बहने के कारण लोगों को 5 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय कर बाजार हाट जाना पड़ता है।

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