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फिरोज अख्तर नया गंजवी गुमनाम और बुजुर्ग शायर थे: उलेमा, दानिश्वरान


वैशाली जिला ब्यूरो प्रभंजन कुमार मिश्रा की रिपोर्ट

हाजीपुर(वैशाली)जिले के महनार प्रखंड के नया गंज स्थित हाजी फिरोज अख्तर मरहूम के आवास पर उनकी याद में सालाना मिलादुन्नबी एवं किताब के विमोचन का कार्यक्रम आयोजित किया गया।कार्यक्रम की अध्यक्षता व संचालन मौलाना महबूब आलम मिस्बाही ने किया।इस अवसर पर हाजी फिरोज अख्तर उर्फ अख्तर हुसैन नया गंजवी की याद में इनके बेटे मोहम्मद जावेद अख्तर,मोहम्मद सऊद अख्तर,मोहम्मद फरीद अख्तर, मोहम्मद तौहीद अख्तर, मास्टर रहमतुल्लाह (दामाद)के प्रयासों से इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉक्टर जफर अंसारी जफर के द्वारा लिखी गई किताब "कुर्बतों के दरमियां"(हिन्दी) और "हासिल ए जिंदगी"(उर्दू) का विमोचन उलेमा व बुद्धिजीवी के हाथों हुआ।इस अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मौलाना मोहिब्बुर्रहमान मुजफ्फरपुरी,मौलाना हैदर अली कादरी,मौलाना महबूब आलम मिस्बाही,डॉक्टर मोहम्मद कलीम अशरफ आदि ने कहा कि मशहूर शायर हाजी फिरोज अख्तर मरहूम की शायरी आप बीती से जग का सफर रहा है।

इस सफर में उन्होंने अपनी हर शेर को हीरे और मोती से पिरोने का काम किया है।फिरोज अख्तर की कलाम में कोई रूकावट नहीं।वो सादगी पसंद और सादा लोह कलमकार भी थे।वो मामूली पढ़े लिखे थे लेकिन बड़े शायर थे।अल्लाह ने उन्हें कमाल का इल्म दिया था।अख्तर साहब की कलाम की शफ्फाफियत और तहारत और इसका गुदाजपन,कल्बो-जिगर और फिक्रो नजर को एक ठोस विज्दानी और रूहानी कैफ़ियत से सरशार करता है।नातिया शायरी हो या गजलिया शायरी दोनों में ही एक अजीब वालिहाना कैफ़ियत है जो समाअत और बसीरत दोनो को गैर मामूली तौर पर मोतास्सिर करती है।

आज के दौर में अब ऐसा पाकीज़ा कलाम कहां और किसे नसीब।वहीं कार्यक्रम में उलेमाओं ने इनकी याद में आयोजित मिलादुन्नबी से संबोधित करते हुए कहा कि नेक औलाद वालिदैन के लिए सदका ए जारिया है।अपने आबा ओ अजदाद,वालिदैन की यादगार मनाते रहें।उलेमाओं ने हाजी फिरोज अख्तर मरहूम को अपने आप में एक अजीम शख्सियत कहा और उनकी जिंदगी पर विस्तार से प्रकाश डाला।बता दें कि हाजी फिरोज अख्तर मरहूम उर्दू शेर ओ अदब के एक काबिल ए कद्र शायर थे।यह बीते साल अगस्त माह में ही वफात पाये थे जिनकी याद मे कार्यक्रम आयोजित किए गए।

जहां उलेमा,दानिश्वरान ने उनके लिए दुआ ए मगफिरत की।कार्यक्रम में तुफैल अहमद पटेल,मोहम्मद शकील,अबदुल लतीफ,मोहम्मद साबिर,अंजुम तुफैल,मोहम्मद इस्लाम अंसारी,नबी हसन,मोहम्मद इनाम,मोहम्मद इरफान,मोहम्मद मिस्टर,मोहम्मद फैजान,लकी,मोहम्मद मोजम्मील,मोहम्मद शाहनवाज अता आदि समेत अन्य गणमान्य लोग शामिल हुए और हाजी फिरोज अख्तर मरहूम के लिए दुआ ए मगफिरत की।कार्यक्रम का समापन दुआ से किया गया।

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