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गुणवत्तापूर्ण शिक्षा वर्तमान समय की ज़रूरत : नसीम अख़्तर




वैशाली जिला ब्यूरो प्रभंजन कुमार मिश्रा कि रिपोर्ट 



हाजीपुर (वैशाली) : पिछले कुछ सदियों में हमारे समाज ने जो भी प्रगति की है उसकी वजह शिक्षा है।शिक्षा समाज का आधार होती है।यूनिसेफ़ के मुताबिक बाल-केंद्रित तरीके से होने वाला शिक्षण ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा है जिसमें अध्यापक एक सुगमकर्ता की भूमिका में होते हैं।इसके अंतर्गत स्कूल आने वाला बच्चा स्वस्थ और सुपोषित होता है।कक्षा में भागीदारी और सीखने के लिए उसकी पूरी तैयारी होती है। इसके साथ ही बच्चे का परिवार और समुदाय शिक्षा जारी रखने में उसका सहयोग करते हैं। यानि बच्चे स्कूल से ड्रॉप आउट नहीं होने पाये इसपर विशेष ध्यान दिया जाता है।उक्त जानकारी मोहम्मद नसीम अख़्तर शिक्षक राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय मुस्तफ़ापुर उर्दू प्रखण्ड चेहराकलां जिला वैशाली ने दी।स्कूल का माहौल बच्चे के स्वास्थ्य के लिए अनुकूल और सुरक्षित होता है।वहां जेंडर के आधार पर किसी बच्चे के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जाता है यानि लड़के-लड़की को समान नज़रिये से देखा जाता है।इसके साथ ही संसाधनों व जरूरी सुविधाओं की उपलब्धता को ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का एक पैमाना माना गया है।शैक्षिक पहलू को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का पर्याय न मानकर एक आयाम माना गया है।जिसमें पाठ्यचर्या के अनुसार बनी अच्छी पाठ्य सामग्री से भाषा और अंकगणित के बुनियादी कौशलों का विकास करने की बात कही गई है।इसके साथ-साथ जीवन कौशलों के विकास को भी विशेष महत्व दिया गया है ताकि बच्चा अपने अधिगम का इस्तेमाल सामान्य जीवन में कर सके।

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का एक अहम पहलू शिक्षक प्रशिक्षण भी है।इसके अनुसार स्कूलों में बाल केंद्रित शिक्षण के तौर-तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है।इसमें स्कूल और कक्षाओं का बेहतर प्रबंधन हो पाता है।नसीम अख़्तर ने कहा कि बच्चों के अधिगम को प्रोत्साहित करने के लिए कौशल आधारित आकलन का इस्तेमाल किया जाना चाहिए ताकि अन्य बच्चों के साथ होने वाले भेदभाव को कम किया जा सके।कौशल आधारित आकलन का संदर्भ सतत एवं व्यापक आकलन से लिया जा सकता है। सतत व्यापक मूल्यांकन छात्रों के कौशल विकास की आधारशिला है। शिक्षा में गुणवत्ता लाने के लिए जरूरी है कि शिक्षा के उद्देश्यों का निर्माण भौतिक,सामाजिक,आर्थिक, सांस्कृतिक पर्यावरण के आधार पर किया जाए।सीखने के लिए उचित वातावरण का होना बहुत आवश्यक है और उसके लिए छात्रों के आस-पास का वातावरण,अधिगम एवं शिक्षा के लिए अनुकूल बनाना अति आवश्यक है।

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