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भगवान विश्वकर्मा की पुजा धुमधाम से संपन्न


सोनो जमुई संवाददाता चंद्रदेव बरनवाल की रिपोर्ट

लोह शिल्पी भगवान विश्वकर्मा की पूजा सोनो प्रखंड छेत्रों मे शुक्रवार को हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया है । दर्जनों सुसज्जित पंडालों में भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा स्थापित कर विद्वान पंडितों के द्वारा विधिवत मंत्रोच्चारण के साथ पुजा अराधना करते हुए मंगल आरती के साथ पुजा समापन किया गया ।

 देव शिल्पी भगवान विश्वकर्मा की विशेष पूजा आज के दिन करने से कारोबार एवं व्यापार में काफी वृद्धि होती है , क्योंकि आज ही के दिन भगवान विश्वकर्मा का जन्म हुआ था । बाबा झुमराज धाम बटिया के समीप स्थित विशाल पंचमुखी हनुमान मंदिर के विद्वान पुजारी श्री मिथलेश कुमार पाण्डेय ने बताया कि हिंदू धर्म के मान्यताओं के मुताबिक भगवान विश्वकर्मा को निर्माण का देवता माना गया है, क्योंकि उन्होंने सतयुग में स्वर्ग लोक , त्रेतायुग में लंका एवं द्वापर युग में इन्द्रप्रस्त , द्वारिका तथा हस्तिनापुर का निर्माण किये थे।

 जबकी कलियुग में पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर में स्थापित भगवान कृष्ण , बलराम एवं माता सुभद्रा की मुर्ति का निर्माण किया था , जिस कारण भगवान विश्वकर्मा जी को ब्रह्मांड का निर्माण ओर सृजन कर्ता देव मानी जा रही है । उन्होंने बताया कि हिंदू धर्म के पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सृष्टि के आरम्भिक रचना के समय भगवान बिष्णु क्षीर सागर में प्रकट हुए , एवं उनकी नाभी से ब्रह्मा जी प्रकट हुए थे , ओर फिर ब्रह्मा जी के सात पुत्र हुए । 

जिसमे सातवें पुत्र का नाम वास्तु रखा गया जो शिल्प कला मे परिपुर्न थे , जिनके विवाह के बाद एक पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई जिनका नाम विश्वकर्मा रखा गया जो अपने पिता से भी अद्वितीय शिल्प कला मे निपुन थे , जिस कारण विश्वकर्मा जी को देवताओं का शिल्पकार देव माना गया है ।

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