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भगत सिंह की जन्म जयन्ती पर आयोजित संगोष्ठी में याद किये गए भगत सिंह


उन्नाव से जिला ब्यूरो रिपोर्ट

शहीद ए आजम भगत सिंह  की जन्म जयन्ती पर  भारतीय नागरिक परिषद् के तत्वावधान में आयोजित संगोष्ठी में भगत सिंह का स्मरण किया गया और मजदूर आन्दोलन व मजदूरों के हक में भगत सिंह द्वारा उठाये गए सवालों पर विचारोत्तेजक परिचर्चा हुई।

          आई आई ए भवन में आयोजित संगोष्ठी "भगत सिंह और मजदूर आन्दोलन" में मुख्य अतिथि उप्र की शिक्षा राज्य मन्त्री श्रीमती नीलिमा कटियार थीं और  मुख्य वक्ता ऑल इण्डिया पॉवर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे थे | 

           संगोष्ठी की अध्यक्षता भारतीय नागरिक परिषद् के अध्यक्ष चन्द्र प्रकाश अग्निहोत्री ने की और संचालन महामन्त्री रीना त्रिपाठी ने किया   | 

         मुख्य अतिथि शिक्षा राज्य मंत्री श्रीमती नीलिमा कटियार ने कहा शहीद ए आजम भगत सिंह  विश्व के उन वीर क्रांतिकारियों की परंपरा में से थे जिन्होंने विभिन्न देशों के इतिहास में नवजीवन का संचार किया तथा राष्ट्रीय चेतना को जगाया। वे भारत के इतिहास में उस सतत संघर्ष और गौरवमय पीढ़ी के प्रतीक थे, जिन्होने देश के लिए अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया। वे एक निर्भय क्रांतिकारी के साथ एक प्रबुद्ध विचारक,गहन अध्यनकर्ता,प्रगतिशील चिंतक और अद्वितीय लेखक थे। सही मायने में वे क्रान्ति की आत्मा थे और क्रान्ति उनके रोम रोम में बसी थी। उन्होंने कहा भगत सिंह की प्रासंगिकता युवा भारत के उदय के साथ और बढ़ गई है। भगत सिंह सचमुच एक राष्ट्रनायक थे । 23 मार्च 1931 में शहादत के 90 साल बाद भी वे सबसे अविस्मरणीय प्रतीक बने हुए हैं।

         मुख्य वक्ता शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि भगत सिंह के स्मरण का अर्थ है हर क्षेत्र , हर दल और विचार में घुसी जातीय विद्रूपताओं व् संकीर्णताओं को अपने व्यवहार से ख़त्म करे , दहेज़ , कन्या भ्रूण ह्त्या , स्त्री अपमान , अंध विश्वास भगत सिंह की क्रांतिकारी ज्वालाओं में भस्म हों तभी उनका स्मरण सार्थक होगा | उन्होंने कहा  जहाँ भी अन्याय, जुल्म और अनाचार है उसके खिलाफ उठने वाली हर आवाज भगत सिंह है | 

         उन्होंने कहा कि भगत सिंह चन्द्र शेखर आजाद से मिलने के लिए कानपुर आये थे और  एक पत्रकार के तौर पर गणेश शंकर विद्यार्थी के अखबार में काम करने लगे थे। कानपुर में ही भगत सिंह मजदूर आंदोलन से जुड़े और मजदूरों के हक में अंत तक आवाज उठाते रहे। सेंट्रल असेम्बली में  उन्होंने श्रम आंदोलन विरोधी बिल रोकने के लिए ही बम फेंका था। बड़े पैमाने पर मुनाफा कमा रहे सार्वजनिक क्षेत्रों भारत पेट्रोलियम , राष्ट्रीयकृत बैंकों , एल आई सी , रेलवे , चंडीगढ़ व् दादरा नगर हवेली की बिजली वितरण कंपनियों आदि को निजी घरानों को बेंचने को शहीदों के सपनों के साथ कुठाराघात बताते हुए उन्होंने कहा कि भगत सिंह मजदूरों और किसानों का राज्य चाहते थे जबकि सार्वजानिक क्षेत्र बिकने से कारपोरेट घरानों का वर्चस्व स्थापित होगा।

 भगत सिंह ने कहा कि युद्ध छिड़ा हुआ है और यह युद्ध तब तक चलता रहेगा जब तक कि शक्तिशाली व्यक्ति भारतीय जनता और श्रमिकों की आय के साधनों पर एकाधिकार जमाये रखेंगे। :चाहे ऐसे व्यक्ति अंग्रेज पूंजीपति हों या सर्वथा भारतीय पूंजीपति। भगत सिंह ने कहा कि यह युद्ध न तो हमने प्रारम्भ किया है और न यह हमारे जीवन के साथ समाप्त होगा। भगत सिंह ने कहा हम  गोरी बुराई की जगह काली बुराई को लाकर कष्ट नहीं उठाना चाहते। बुराइयाँ एक स्वार्थी समूह की तरह एक दूसरे  का स्थान लेने के लिए तैय्यार रहती हैं।

        असेम्बली में बम फेंकने की प्रेरणा को बयान करते ह भगत सिंह ने कहा- मैंने ट्रेड यूनियनों को संगठित किया,शांतिपूर्ण प्रदर्शन किए पर श्रमजीवी मेहनतकशों के शोषण पर स्थापित पूंजीवादी कर्णधारों पर कोई प्रभाव नही पड़ा। तब मेरे मन मे यह विचार उत्पन्न हुआ कि असेम्बली में बम धमाका किया जाए जिससे शासक जाग जाएं।बहारों को सुनाने के लिए धमाके की जरूरत होती है, यही सोचकर मैन असेम्बली में बम फेंका।

           उन्होंने कहा कि भारत मे बार बार जन्म लेने की इच्छा प्रकट करने वाले भगत सिंह यदि  आज फिर से जन्म लेकर आ जाएं तो देश मे व्याप्त गरीबी और समाज के अधोपतन को देख उनकी आंखों में आंसू आ जाएंगे और वे सोचेंगे कि क्या इसी आजादी के लिए उन्होने प्राणों का बलिदान किया था। 

        उन्होंने कहा 130 करोड़ भारतीय भगत सिंह बनें,अन्याय के खिलाफ बगावत करें,बहरों को सुनाने के लिए विस्फोट करें तो पता चलेगा कि सिर्फ धन सम्पदा और राजमार्गों से देश नही बनता बल्कि वह बनता है मन के धनी ज्वालामुखियों से भरतीय नागरिक परिषद के अध्यक्ष चन्द्र प्रकाश अग्निहोत्री, महामंत्री रीना त्रिपाठी, अभियंता संघ के महासचिव प्रभात सिंह, अश्वनी चतुर्वेदी, संतोष तिवारी, विजय त्रिपाठी, आनंद कुमार,अनुराग पांडेय व अन्य वक्ताओं ने कहा बिजली , पानी , सड़क , बुनियादी जरूरतों और स्पेस रिसर्च व् डिफेन्स सेक्टर का निजीकरण भगत  सिंह के विचारों के भारत से मेल नहीं खाता | इससे बेरोजगारी तो बढ़ेगी ही राष्ट्रीय सुरक्षा को भी खतरा पैदा होगा | संगोष्ठी में संकल्प लिया गया कि व्यापक राष्ट्रहित में सार्वजानिक क्षेत्र बचाओ - देश बचाओ अभियान चलाया जाएगा।

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