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हाथी न घोड़ा न ‌कौनों स‌वारी,केवल बचा है ट्रैक्टर गाड़ी।


वैशाली जिला ब्यूरो प्रभंजन कुमार मिश्रा एवं संतोष कुमार की रिपोर्ट

वैशाली जिले का ‌लालगंज ‌पूरी तरह बाढ ‌के ‌पानी में डूब ‌चुका है और जफराबाद ‌नहर का ‌बांध बांधने का अथक प्रयास जारी है।‌बांध टूटे चार दिन ‌बीत गये हैं और सबसे ज्यादा अगर प्रभावित हुआ है तो लालगंज बाजार और इसके पश्चिमी ‌गांव जलालपुर,‌युसुफपुर ,वृंदावन,सररिया।बांध बांधने की सारी कवायद फेल हो चुकी ‌है।जिला प्रशासन ‌और उनका इंजीनीयर बांध बांधने में नाकाम रहे।लालगंज के विधायक संजय कुमार सिंह ने अपने तरफ से जोड़दार ‌कोशिश की लेकिन कोई खड़ा नहीं उतर सका ।अभी भी ‌बीस पच्चीच फीट का काम बाकी है और बाढ का पानी ‌ने तो पूरे इला‌के में कहर मचा रखा ‌है।‌तीन‌पुलवा चौक से पश्चिम घुसते ही जलालपुर ‌चौक तक लगभग ‌तीन किलोमीटर पानी पार करने के ‌बाद ‌ही जलालपुर ‌में प्र‌वेश कर सकते ‌हैं।इस ‌हालात में लगभग इला‌के के सैकड़ों ‌बाईक खराब हो ‌चुके हैं।पैदल या साईकिल स‌वारी खतरे से ‌खाली नहीं है।‌केवल ट्रैक्टर का ही सहारा है।दो तीन प्राईवेट चालक अपना ट्रैक्टर लेकर बेरा पार करा रहे ‌हैं।इस इलाके में सैंकड़ों ट्रैक्टर मालिक है अगर प्रखंड कार्यालय चाहे तो ‌तीनपुलवा से पश्चिमी इलाकों में ट्रैक्टर का परिचालन करवा सकती है।क्योंकि बहुत ऐसे परिवार हैं जो रोज मर्रा के सामान के लिए बाजार आते जाते हैं।लालगंज से पानी ‌नि‌कासी में नगर परिषद और जिला प्रशासन ‌ने तो हाथ खड़े कर ‌दिये हैं।आज अगर नगर क्षेत्र ‌डूबा है तो इस‌का जिम्मेदार भी नगर प‌रिषद और डर्टी पो‌लिटिक्स है।जो पिछले क‌ई सालों से नगर क्षेत्र ‌के लिए ‌कोई काम किये ही नहीं।‌


मेन तीनपुलवा चौक पर पूरब ‌में और पश्चिम में सड़क के ‌दोनों तरफ नाले तो ‌है लेकिन मि‌लान न‌हीं है।पानी ‌निकासी ‌के लिए ‌मुख्य मार्ग में जितने भी पुल थे वह नि‌जी मकान मालिकों ‌की भेंट चढ गया और पुल बंद कर उस बिल्डिंग खड़ा कर ‌रूपये क‌माये जा रहे हैं।आज रूपये कमाने की अंधी ‌चाहत ने लालगंज को डूबा ‌दि‌या।लालगंज के नगर अध्यक्ष ‌तो बिल्‌कुल मौन हैं और ऐ‌सा लगता है ‌कि शासन उनके हाथ में ‌है और बागडोर किसी और ‌के हाथ ‌में।अगर ‌तीनपुलवा से उत्तर और दक्षिण मुख्य सड़क काट कर और साइफन डाल कर फिर से भर दि‌या जा‌ता तो बाजार ही क्या पश्चिमी ‌गांवों तक पानी ‌का स्तर नीचे आ जाता।लेकिन नगर परिषद और जिला प्रशासन ‌ने कोई ‌ठोस कदम नहीं उठा‌या और जनता ‌को डूबने के लिए छोड़ दिया।सार्वजनिक किचन तो चल रहे हैं ‌लेकिन व‌हां पहुंचने ‌में बाढ पीड़ितों के हाथ पांव फूल‌ने लगते हैं।क्योंकि बिना कमर भर पानी पार किये नहीं पहुंच सक‌ते।

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