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ग्रामीण कार्य विभाग सह जिला प्रभारी मंत्री जयंत राज ने बाढ़ क्षति की समीक्षा बैठक की


हाजीपुर(वैशाली)
ग्रामीण कार्य विभाग सह जिला प्रभारी मंत्री जयंत राज ने स्थानीय समाहरणालय सभागार में जिले में बाढ़ एवं अतिवृष्टि से हुए क्षति को लेकर समीक्षा बैठक की।इस दौरान उन्होंने जिले में हुए फसल क्षति का आकलन करते समय उसमें केला, पपीता, आम, लीची, सब्जी एवं अन्य फसलों को भी शामिल करने को कहा। उन्होंने कहा कि जिले में वैसे क्षेत्र जहां किसान फसल नहीं लगा पाए है और वह क्षेत्र जलमग्न हो गया है इसका भी आकलन करें।इसके साथ ही बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सड़कों से पानी हटते ही उसका पुनर्स्थापन कराने की कार्रवाई करें ताकि वह चलने लायक हो सके और आवागमन में कोई असुविधा नहीं हो।वहीं उन्होंने कहा कि जिले के विधायकों से परामर्श लेकर एवं समन्वय स्थापित कर सभी कार्यों को पूरा कराने में तेजी तथा नल जल योजना में जहां-जहां जलापूर्ति बाधित है, इसका प्रतिवेदन उपलब्ध कराएं।बैठक में शामिल वैशाली विधायक सिद्धार्थ पटेल ने कहा कि बाढ़ और भारी बारिश से वैशाली, पटेढ़ी बेलसर और गोरौल आदि प्रखंडों में किसानों की व्यापक क्षति हुई है।उन्होंने यहां ऐतिहासिक स्थलों पर जल-जमाव नहीं हो इसकी समुचित ठोस व्यवस्था कराने का भी अनुरोध किया।महुआ विधायक डॉक्टर मुकेश रौशन एवं राजापाकर विधायक प्रतिमा कुमारी ने अपने क्षेत्र को बाढ़ प्रभावित घोषित करने की मांग की।इस मौके पर मंत्री ने कोरोना संक्रमण से 8 मृतकों के स्वजनों को 4-4 लाख रुपये का चेक वितरण किया।बैठक में जिलाधिकारी उदिता सिंह ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से जिले में बाढ़ राहत कार्यो की जानकारी दी।जिलाधिकारी ने बताया कि लगातार बारिश, यास तूफान और नदियों के जलस्तर में वृद्धि से जिला में 13 प्रखंडों के 29 पंचायत पूर्ण रूप से बाढ़ प्रभावित हुए हैं।जबकि 62 पंचायतें आंशिक रूप से प्रभावित हैं। राघोपुर प्रखंड के सभी 21 पंचायतें पूर्ण रूप से बाढ़ प्रभावित हुए हैं। इस दौरान जिले की कुल 4,34,062 आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई है।इस बार वाया नदी भी काफी असर डाली है जिसके कारण भगवानपुर, पटेढ़ी बेलसर, वैशाली, गोरौल, लालगंज, महुआ, राजापाकर आदि प्रखंड प्रभावित हुए हैं।जिलाधिकारी ने बताया कि जिले में कुल 155 जगहों पर सामुदायिक किचन चलाकर बाढ़ प्रभावित परिवारों को भोजन उपलब्ध कराया गया है, जिससे 19,98,603 व्यक्ति लाभान्वित हुए हैं।जिला में 213 नावों का परिचालन कराया गया है अभी भी 64 नाव चलाए जा रहे हैं। सबसे अधिक 88 नाव राघोपुर प्रखंड में चलाए गए। जिला में कुल 7 राहत केंद्र बनाए गए जिसमें 4 राघोपुर तथा एक-एक बिदुपुर, देसरी और महनार में है। बाढ़ प्रभावित लोगों के देखभाल के लिए 247 स्वास्थ्य केंद्र चलाकर कुल 13,207 लोगों का इलाज तथा 41,935 हेलोजेन टैबलेट वितरित किए गए। जल जमाव वाले क्षेत्र में 509 किलोग्राम ब्लिचिंग पाउडर का छिड़काव किया गया। बाढ़ प्रभावित पशुओं की देखभाल के लिए 27 पशु कैंप चलाए गए, जहां 8224 पशुओं का उपचार किया गया। जिले में 9 पशु मृत प्रतिवेदित है, जिसमें 8 का सहायता अनुदान का भुगतान कर दिया गया और एक के भुगतान प्रक्रिया की जा रही है।

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