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चुनाव आचार संहिता लगने के बाद पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा राहत सामग्री वितरण में भाग लेना कहां तक जायज।


वैशाली जिला ब्यूरो प्रभंजन कुमार मिश्रा एवं कमलेश किशोर की रिपोर्ट 

सोशल मीडिया क्षेत्र में वायरल हो रहा है गोरौल प्रखंड अंतर्गत पड़ने वाले पिरोई शमसुद्दीन पंचायत के वार्ड सदस्यों द्वारा पंचायत क्षेत्र में सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई राहत सामग्री का 3 सितंबर 21 को पिरोई पंचायत भवन पर हुए वितरण में भागीदारी लेना कहां तक जायज है। यह खबर वैशाली जिले की है। जहां 3 सितंबर 21 को गोरौल प्रखंड अंतर्गत पड़ने वाले पिरोई समसुद्दीन पंचायत के पंचायत भवन पर हुए बाढ़ राहत खाद्य सामग्री के वितरण में पंचायत के वर्तमान पंचायत सदस्यों के द्वारा राहत सामग्री वितरण में भागीदारी लेना और उसके बाद लोगों का यह कहना कि वहां पर मौजूद वार्ड सदस्य द्वारा चुनिंदा लोगों को राहत सामग्री दे बाकी को लौटा दिया गया। वो भी ऐसी विकट परिस्थिति में जबकि पूरा पंचायत बाया नदी के पानी एवं बारिश के कारण पूरा पंचायत जलमग्न हो चुका है, सोचने की विषय है।

 इस संबंध में जब हमारी टीम पिरोई पंचायत के वार्ड संख्या 3 में पहुंची तब वहां के ग्रामीणों ने बताया कि पंचायत भवन पर हुए चूड़ा गुड़ के वितरण में वार्ड सदस्य द्वारा अपने करीबी लोगों को गुड़ एवं चुरा दिया गया वहीं हम लोगों को वहां से भगा दिया गया। इस संबंध में जब हमारी बात वार्ड सदस्य श्री रजनीश कुमार से हुई तब उन्होंने बताया कि यह सिर्फ हमें फंसाने की साजिश है जब की मैं वहां गया ही नहीं आगे सुनते हैं कि रजनीश कुमार अपने बचाव में क्या कहते हैं एवं गांव वालों का क्या आरोप है साथ ही वायरल फोटो क्या कहता है।

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