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अनंत चतुर्दर्शी पूजा करने के बाद लोगों ने संकटों से रक्षा करने वाला अनंत सूत्र बांधा






दावथ (रोहतास) : प्रखंड के शहर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में रविवार को अनंत पूजा  बड़े ही धूमधाम व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। अनंत पूजा हर वर्ष भाद्रपद मास के शुक्लपक्ष चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। अनंत चतुर्दशी पूजा को लेकर दावथ प्रखण्ड के सभी मंदिरों में रविवार की सुबह से ही भीड़ जुटने लगी थी। पूजा को लेकर बाजार में भी काफी चहल-पहल देखी गई। इस सम्बंध में माँ आसावरी मंदिर के पुजारी अंजनी पाठक ने बताया कि इस दिन पूजा करने के बाद संकटों से रक्षा करने वाला अनंत सूत्र बांधे जाने की परंपरा है। मान्यता है कि इस रक्षा सूत्र को बांधने के बाद भगवान उनकी रक्षा करते है और सभी दुख को दूर करते हैं। कहा जाता है कि महाभारत में जब पांडव अपना सारा राज-पाठ जुआ में हार गये थे और कष्टदायक वनवास जीवन व्यतीत कर रहे थे, तब कृष्ण भगवान ने पांडवों को अनंत चतुर्दशी का व्रत करने को कहा था। तब धर्मराज युधिष्ठिर ने अपने सभी भाइयों के साथ विधि-विधान के साथ अनंत चतुर्दशी का व्रत रखा। जिसके बाद पांडव पुत्र एवं द्रोपदी सभी संकट से मुक्त हो गए। तब से अनंत चतुर्दशी का पर्व मनाया जाता है। इस पर्व में विष्णु भगवान की पूजा होती है। वहीं पर्व को लेकर दुकानों में रंग-बिरंगे अनंत के डोरे सजे हुए हैं। जिनको खरीदने के लिए दुकानों पर भीड़ लगी हुई है। ग्राहक अपने मन के अनुसार अनंत की डोर को खरीद रहे थे जिनकी कीमत पांच रुपये से लेकर 30 रुपये तक रखी गई है। वहीं फलों और मिठाई की दुकानों पर भी भारी भीड़ दिखी। मिठाई के दुकानदार विभिन्न प्रकार के मिठाई को बना कर बेचते नजर आए।

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