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जमें अधिशाषी अभियंता जयप्रकाश का संविदा कर्मी पर लगातार कहर जारी।


उन्नाव से जिला ब्यूरो चीफ अवधेश कुमार की रिपोर्ट

पिछले चार सालों से बांगरमऊ खण्ड कार्यालय में जमें अधिशाषी अभियंता जयप्रकाश का संविदा कर्मी पर लगातार कहर जारी।

हम बात कर रहे है सफीपुर उपकेन्द्र में तैनात संविदाकर्मी अजय प्रताप सिंह पुत्र मुन्नु सिहं की। अधिशाषी अभियंता बांगरमऊ जय प्रकाश द्वारा उनको काफी दिनों से प्रताड़ित किया जा रहा था। परन्तु अभी तक जिले के आला-अधिकारियों ने कोई उचित व ठोस कार्यवाही नही की है जिससे एक ही पावर हाउस व एक ही जिले में डटे एक्सईएन महोदय के हौसले बुलन्द है।अब साहब पर कौन मेहरबान है यह तो नही पता पर अपने कार्यो को लेकर हमेशा चर्चा में बने रहते है।

प्रभात भेदी अखबार नें खबर को प्रमुखता से चलाया था परन्तु अभी तक कोई भी सन्तोष जनक कार्यवाही ना होने से कहीं ना कहीं जिम्मेदार पद पर बैठे अधिकारीयों के काम ना करनें के रवैये को भी दर्शाता है। 

मामला यह था कि संविदाकर्मी अजय प्रताप सिंह ने बताया कि पूर्व में वह डिस्कनेक्शन सुपरवाईजर के तौर पर विभाग में अपनी सेवा प्रदान कर रहा था। इस दौरान अधिषाशी अभियंता जय प्रकाश द्वारा डिस्कनेक्शन एमबी कराने हेतु प्रति कनेक्शन 15% धनराशि की मांग की जा रही थी। जिसपर सविंदा कर्मी द्वारा प्रतिकनेक्शन 10% धनराशि अधिशाषी अभियंता जयप्रकाश को दी गई। अधिशाषी अभियंता की इच्छा अनुसान उनके द्वारा बताई गई धनराशि उन्हें मिलने पर अजय प्रताप सिहं से झगड़ा भी हुआ था।

खैर कुछ दिनों बाद मामला शांत हो गया।

उसी खुन्नस को लेकर वर्तमान समय में सफीपुर उपकेन्द्र में संविदा कर्मी अजय प्रताप सिहं विभाग को अपनी सेवाएं प्रदान कर रहा था। लेकिन अपने पद की अकड़ और रौब दिखाते हुये पुरानी खुन्नस निकालने के लिये अवर अभियंता द्वारा फर्जी षडियंत्र रचकर बेसिंल मुख्यालय पत्र भेजकर कार्यमुक्त किये जाने की मांग की थी जब कार्यमुक्त नही हो पाया अजय प्रताप सिंह तो सफीपुर पावर हाउस से उन्नाव दही चौकी स्थानांतरण कर दिया। जो कि प्रार्थी के घर से लगभग 40 किलोमीटर दूर है रोज आने-जाने भर से ही प्रार्थी की पूरी सैलरी ही खत्म हो जायेगी यहां से रोज आना जाना संविदाकर्मी के लिये आकाश से तारे तोड लानें के बराबर है। क्या कमाएगा और क्या खायेगा और सबसे बड़ी बात तो यह है कि वह अपना इतनी मंहगाई में घर कैसे चलायेगा। 

अब सोचनीय विषय यह है कि जब इतने जिम्मेदार पद पर बैठे अधिकारी अपने पद की गरिमा भूलकर जनसमस्याओं के निवारण के बजाये अपने ही कर्मचारियों को प्रताड़ित कर रहे है तो। यह आम जनमानस व उपभोक्ताओं के साथ कैसा व्यव्हार करते होेंगे यह एक सोचनीय विषय है।

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