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मानपुर के चक्रसन के सरेह में बाघ ने पांच बकरियों को बनाया अपना निवाला,दहशत


रिपोर्ट अक्षय कुमार आनंद बेतिया बिहार

मैनाटाड़: वाल्मीकि व्याघ्र परियोजना जंगल से सटे मानपुर थाना क्षेत्र के चक्रसन गांव के तीनमोहान छठिया घाट के पास चर रहीं पांच बकरियों को बाघ ने अपना निवाला बना लिया है। जिससे चक्रसन,गम्हरिया, जिगना, पड़रिया, हरदिया, पुरैनिया एवं मानपुर गांव के लोगों में भय का माहौल है। बाघ के डर से लोगों ने सरेह में जाना छोड़ दिया है । वहीं चक्रसन के ही संजय ठाकुर एवं मनोहर उरांव के खेत में बाघ के पगमार्क भी लोगों ने देखा है। ग्रामीण विनय उरांव, रामप्रीत उराव, गोविंद उरांव, विजय उरांव, वीरसिंह उरांव, शुभनारायण उराव, जितेंद्र उराव, सर्वेश उरांव, प्रभावती देवी, सरिता देवी आदि बताया कि गांव के तीनमोहान छठिया घाट के पास बकरियां चर रहीं थीं।तभी कुछ बकरियां गायब हो गयी। थोड़ी देर के बाद देखा गया कि पांच बकरियों का शव जीर्ण शीर्ण अवस्था में गन्ना के खेत के पास पड़ा हुआ है। सूचना पर जब ग्रामीण मौके पर पहुंचे तो संजय ठाकुर और मनोहर उरांव के ईख के खेत में बाघ के पगमार्क देख लोगों के होश उड़ गये। लोगों ने वहां से भाग कर अपनी जान बचाया। ग्रामीणों ने बताया कि पूरी संभावना है कि जंगल से भटक क बाघ इधर के सरेह में आया है। पदचिन्ह देखने से पता चल रहा है कि बाघ ईख के खेत में ही डेरा डाले हुए हैं। ग्रामीणों ने बताया कि बाघ के भय से हम सभी खेतों की तरफ जाना छोड़ दिये हैं ।एक तरफ तो जंगली सूअर,हिरण , नीलगायों ने खेतों में लहलहाती धान की फसल खाकर बर्बाद कर रहे हैं। तो दूसरी तरफ बाघ के डर से जंगली जानवर नीलगाय हिरण से भी हम अपनी फसल को नहीं बचा पा रहे हैं।

।वही मंगुराहा वन क्षेत्र के रेंजर सुनील पाठक ने बताया कि ग्रामीणों के द्वारा बाघ के पगमार्क देखे जाने और पांच बकरियों के खा जाने की सूचना मिली है।टाइगर के पदचिन्ह की जांच के लिए वन कर्मियों को लगाया गया है। जानवरों का गंध पाकर बाघ जंगल के समीप निकला होगा। बाघ से बचने के लिए लोगों को भी जागरूक किया जा रहा है कि अपने खेतों की तरफ अकेले नहीं जायें। उल्लेखनीय है कि इसी साल फरवरी में पुरैनिया गांव से सटे सहोदरा थाना क्षेत्र में विगत महीने में जंगल से निकली बाघिन ने खेत में अपनी फसल की रखवाली कर रहे पति-पत्नी को अपना निवाला बना लिया था। आदमखोर बाघिन को वन विभाग ने बड़ी मशक्कत से मानपुर वन कार्यालय के समीप मानसरोवर झील से उसे रेस्क्यू किया था।

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