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बिक्रमगंज नप में संकेतबोर्ड बना लूटखसोट का जरिया





कुछ का अस्तित्व समाप्त तो कुछ दिख रहा क्षतिग्रस्त


बिक्रमगंज(रोहतास) । नगर परिषद की गलियों का पहचान दिलाने के लिए नगर परिषद बिक्रमगंज ने गलियों के मुख्य द्वार पर पर साइनबोर्ड (संकेत बोर्ड) लगाने की योजना बनाई । जिसे महीनों पूर्व कोरोना संक्रमणकाल में नगर के मुख्य मार्गो के किनारे स्थित गलियों के मुख्य द्वार से लेकर विभिन्न सरकारी कार्यालयों व आवासों के समीप लगाया गया था । बताया जा रहा है कि एक साइनबोर्ड (संकेत बोर्ड) की लागत खर्च लगभग साढ़े 23 हजार रुपया निर्धारित है । जिसमें ट्रांसपोटिंग खर्च से लेकर स्थल पर लगाने तक शामिल है । बताया जा रहा है कि मुख्य मार्गो के गलियों के मुख्य द्वार पर महीनों पूर्व नगर परिषद ने संकेत बोर्ड लगाया था। जिसमें अधिकांश बोर्ड क्षतिग्रस्त होकर जीर्णशीर्ण अवस्था में पहुंच गया है तो कुछ मुख्य स्थल से ही कई गायब हो गए है । हालांकि अभी कही - कही सहीसलामत भी दिख रहा है । नगरवासियों का मानना है कि संकेत बोर्ड वही पर सहीसलामत व सुरक्षित बचा है जहां नगर के लोग जागरूक है या फिर पुलिस व प्रशासनिक कार्यालयों एवं आवासों के समीप लगा है तथा सुरक्षा के दृष्टिकोण से निगरानी हो रहा है । लेकिन गायब या क्षतिग्रस्त संकेत बोर्डो का नप कोई सुध नही ले रहा है । वार्ड के नागरिकों का कहना है कि प्रत्येक वार्डो में दर्जनों की संख्या में गलियां मौजूद है । लगभग प्रत्येक बीस या तीस गज की दूरी पर एक गली मौजूद है । जहां पर एक बोर्ड गाड़कर उखाड़ दिया गया है , जो प्राकलन के अनुरूप नही है । उधर वार्ड संख्या छह के संभावित उम्मीदवार रिंकू कुशवाहा का आरोप है कि नप लूटखसोट एवं कमीशनखोरी करने के उद्देश्य से बेवजह वार्डो के अंदर स्थित गलियों में बोर्ड लगाया गया है । जिसका कोई औचित्य दूर तक नजर नही आ रहा है । दिलचस्प व मजेदार तथ्य तो यह है कि यह संकेत वोर्ड गलियों के मुख्य द्वार पर लगाने की जगह गलियों के अंदर अवस्थित कई वार्ड पार्षदो के निवास एवं निवास के अंदर यानी बाहर व भीतर दो बोर्ड लगाया गया है । एक गली का संकेत तो दूसरा पार्षद का साइनबोर्ड एवं निवास स्थान का चर्चा उल्लेखित है । हालांकि यह जांच का विषय है और जांचोंपरांत ही मामले का खुलासा हो पायेगा । महिला नेत्री रिकू कुशवाहा ने डीएम को पत्र भेजकर आरोप लगाया है कि नगर परिषद बिक्रमगंज में वित्तीय अनियमितता के तहत इसका सदुपयोग करने के बजाय जनता के गाढ़ी कमाई का दुरुपयोग किया गया है । जिसकी उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए ।

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