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केवीके बिक्रमगंज में बायोचार उत्पादन तकनीक पर प्रशिक्षण आयोजित


बिक्रमगंज
(रोहतास)कृषि विज्ञान केंद्र रोहतास बिक्रमगंज में जलवायु अनूकुल कृषि कार्यक्रम के अंतर्गत बायोचार उत्पादन तकनीक पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया । इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ आर के गुप्ता मुख्य वैज्ञानिक पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी लुधियाना मौजूद थे । उन्होंने उपस्थित शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा की जैविक खाद के रूप में बायोचार का इस्तेमाल खेतों में करके पराली प्रदूषण से आसानी से निजात पाया जा सकता है । एक एकड़ खेत में लगभग 20 क्विंटल बायोचार की जरूरत होती है । डॉ आर. एन. सिंह सह निदेशक प्रसार शिक्षा ने जानकारी दी कि बिहार में पहली बार कृषि विज्ञान केंद्र रोहतास द्वारा बायोचार बनाने की इकाई की स्थापना की गई है ।

 बिहार कृषि विश्वविद्यालय द्वारा और 10 केंद्रों में बायोचार बनाने की इकाई की स्थापना की गई है जो इसी वर्ष शुरुआत की गई जाएगी । आने वाले वर्षों में यह किसानों के यहां भी स्थापित किया जाएगा । केवीके बिक्रमगंज के प्रधान वैज्ञानिक आरके जलज ने कार्यक्रम में बायोचार बनाने की तकनीक एवं उसमें आग लगाने की प्रक्रिया के बारे में कृषकों को जानकारी दी । कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर रामाकांत सिंह मृदा वैज्ञानिक ने किया और उन्होंने किसानों को पराली न जला कर बायोचार वेस्ट डी कंपोजर अथवा स्ट्रा बेलर के इस्तेमाल करने की सलाह दी।

 इस कार्यक्रम में विभिन्न कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों एवं तकनीकी सहायकों ने भाग लिया ।जिसमें डॉक्टर उमेश नारायण, इंजीनियर रविकांत, अजय दास, पंकज कुमार इत्यादि मौजूद थे । कृषको में धर्मेंद्र उपाध्याय, कुमार प्रेमचंद, शशि कुमार, भिखारी राय इत्यादि मौजूद थे । इस कार्यक्रम में वीर कुंवर सिंह कृषि महाविद्यालय डुमराव एवं मत्स्य विज्ञान महाविद्यालय व किशनगंज की 20 छात्र एवं छात्राएं भी उपस्थित रहे।

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