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मुखिया की मनमानी नही दिखा गांव के विकास की तस्वीर, 90वे के दशक में ग्रामीण रहने को विवश

  • विकास के नाम पर सिर्फ राशि का हुआ दुरुपयोग नही हुआ गांव का विकास


रंजन कुमार ब्यूरो चीफ शेखपुरा

पंचायती राज व्यवस्था में गांव के विकास को लेकर राज्य सरकार द्वारा मुखिया प्रतिनिधि को राशि तो उपलब्ध कराती है लेकिन मुखिया मद से किस कदर अपने क्षेत्र का विकास करते हैं इसकी बानगी आज हम आपको दिखाते हैं। यह तस्वीर है शेखपुरा जिले के सदर प्रखंड के गगरी पंचायत का गगरी पंचायत के गगरी पंचायत मुख्यालय गांव का।यहां पंचायत में विकास के दावों की हकीकत बयां करता है। यहां पिछले जितने भी मुखिया की जीत हुई।


लेकिन किसी ने अपने पंचायत के विभिन्न गांवों के विकास करना मुनासिब समझा,गगरी पंचायत अंतर्गत गगरी,गुन्हेसा, पिंडशरीफ, उदासी, सुल्तानपुर, हथौड़ी आता है लेकिन यहां मुखिया के द्वारा विकास के नाम पर सिर्फ कागजी खानापूर्ति की गई और राशि को डकार लिया गया। गगरी पंचायत के अंदर 7 गांव के 11 वार्ड हैं।


लेकिन यहां विकास के नाम पर कुछ नहीं किया गया। गगरी पंचायत के गगरी गांव की यह तस्वीर विकास की हकीकत को दर्शाता है। यहां पिछले 15 वर्षों से गली-नाली किसी से सुधि लेना नही लिया। ग्रामीणों की माने तो 20 वर्षों से आज तक नाली-ढलाई का कार्य नहीं हुआ है। ग्रामीणों ने कहा कि कई गली तो ऐसे हैं जहां आज भी कीचड़ है। जबकि गगरी से होते हुए रुदासी पिंड शरीफ कि सड़क काफी जर्जर है यहां न जाने वाले लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

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