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गंगा एक्सप्रेस-वे अधिग्रहण बना प्रशासन के लिए सर दर्द


यूपी हापुड़ से विशू अग्रवाल की रिपोर्ट

 प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शनिवार 18 दिसम्बर को बहुप्रतिक्षित गंगा एक्सप्रेसवे परियोजना का शिलान्यास करेंगें। जिसको लेकर प्रशासन की सांसे अटकी हुयी है। मेरठ से प्रयागराज तक प्रस्तावित 594 किमी लम्बे एक्सप्रेसवे के लिए जनपद में भूमि अधिग्रहण करना प्रशासन को मुसीबत बना है। मामले में एडीएम श्रद्धा शाण्डियाल ने बताया कि कुछ किसानों की मुआवजे सम्बन्धित अलग मांगे हैं। शीघ्र बैनामा ना करने वाले किसानो की जमीन का अधिग्रहण करने के बाद रकम एडीएम एलए को भेज दी जायेगी। कोशिश है कि शिलान्यास से पूर्व सम्पूर्ण भूमि अधिग्रहण कर लिया जाये। बतादें मेरठ के बिजौली गांव से शुरू होकर प्रयागराज के जुदापुर दाण्डू गांव तक बनने वाला सबसे लम्बा एक्सप्रेसवे है। जोकि हापुड़ से 29 गांवो से जुडेगा। जनपद में 93 प्रतिशत भूमि का अधिग्रहण हो चुका है। जबकि शेष 7 प्रतिशत भूमि के मालिक किसानो को मनाना प्रशासन को सरदर्द बना है। किसान 19 एकड भूमि एक्प्रेसवे निर्माण को देने को तैयार नहीं है। अधिकतर का कहना है कि उन्हें स्थानीय सर्किल रेटो के अनुसार भूमि का मुआवजा नहीं दिया जा रहा ंहै। वहीें डीएम अनुज सिंह ने बताया कि इन किसानो की सहमति को सामाजिक सभाकार आंकलन समीति शासन के निर्देश पर गठित हुयी थी। जोकि किसानो से वार्ता कर बैनामा कराने में जुटी है। दो महीने की अवधि में भी ना मानने वाले किसानो के खिलाफ समीति की सर्वे रिपोर्ट के आधार पर कार्यवाही होगी। शिलान्यास से पूर्व समस्या निस्तारण कर दिया जाएगा। वहीं प्रशासन के कठोर रवैये से अढियल किसानो में बेचैनी है।

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