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कई यूट्यूबर चैनल वाले प्रधान को साफ-सुथरी का सर्टिफिकेट देने पहुंचे उनके दरवाजे


उन्नाव से जिला ब्यूरो चीफ अवधेश कुमार की रिपोर्ट

  • जब जब जांच की बात आती है तब तक दबंग प्रधान कोटेदार पत्रकार को आगे कर कर पत्रकार पर ही वार करता है। ।

पत्रकार का सहारा लेकर हमेशा सुर्खियों में रहने वाला प्रधान व कोटेदार छवि धूमिल हवाला देकर फिर कहता है कुछ पत्रकारों ने पैसे मांगे हैं ना देने के कारण मेरी छवि को धूमिल किया जा रहा है लेकिन यह समझ में नहीं आता कि कभी किसी पत्रकार ने उससे यह पूछा कि अगर तुम सच्चे हो तो आगे वाला अगर कुछ कसम से लेकर कुछ और बात बोले तो आप लोग तैयार क्यों नहीं होते हो क्या तुमने हमेशा पत्रकार को ही मोहरा बनाकर लड़ाना सीखा है।

जिला उन्नाव के सफीपुर क्षेत्र की ग्राम सभा सैता के प्रधान कई वर्षों कोटा चलाकर बन गए हैं करोड़पति ।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये उठता है कि लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाने वाला पत्रकार ही पत्रकार का दुश्मन बन बैठा है क्योंकि चंद पैसों के खातिर अपने जमीर को गिरा बैठा है एक नहीं इसके पता नहीं कहीं जीते जागते उदाहरण है लेकिन अभी का उदाहरण आपको दिया जाता है अभी 3 दिन पहले दबंग प्रधान व कोटेदार पर राशन ना देने का आरोप लगा था उसके साथ ही एक 8 महीने की गर्भवती महिला के साथ जातिसूचक गालियां देकर उसको कोटे से भगा दिया था लेकिन उन्नाव जिले के शासन प्रशासन की उदाहरण तो देखिए कि जहां पर दिन पर दिन प्रधानों से लेकर कोटेदारों पर आरोप लगते हो पर यह बाबू जी इतने माहिर है कि पहले भी 28 लाख रुपए प्रधानी का गबन लगा है जिस पर 7 दिन प्रधानी भी मेंबरों द्वारा चलाई गई थी लेकिन अब हद तो तब हो गई जब आपूर्ति विभाग गांव में प्रधान जी को बता कर उनके ही लोगों की भीड़ इकट्ठा करवा कर ढिंढोरा पीट रहे हैं। कि कोई गड़बड़ी नहीं पाई गई है अरे सवाल उन अधिकारियों से और उन पत्रकार चाटुकारिता करने वालों से है कि कभी भी अपने घर के दरवाजे पर बैठा कुत्ता भी शेर होता है।

 लेकिन उसकी हकीकत उसके 15 से 20 घर छोड़कर अन्य लोगो से लेकर पूछ कर होती उस गोपनीय पूछताछ में तो दूध का दूध और पानी का पानी हो होता है लेकिन कुछ पत्रकार ऐसे हैं जो कि दूसरे को नीचा दिखा कर अपना जमीर बेच कर काम करते हैं वही प्रधान जी बाबू जी को चमकाने के लिए लिख दिया कि प्रधान की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया गया अब जनता पूछ रही है क्या इन महोदय से और शासन से पूछा जाए जिसका पति बाहर हो और 8 महीने की गर्भवती दौड़ दौड़ कर चक्कर लगा रही हो क्या वह आरोप निराधार हैं क्या किसी अधिकारी ने उनके दरवाजे भी जाकर या और गांव में पढ़ने वाले तीन से चार खेड़ा और डेरे में लोगों से पूछा क्योंकि इनका पैसा बन चुका है कि पत्रकार को ही आपस में लड़कर कर इनकी अपनी छवि को साफ करना इसीलिए लोकतंत्र का चौथा स्तंभ आज पूरी तरह बदनाम है कुछ चाटुकार तथाकथित पत्रकारों के चक्कर में सबको उसी नजरिए से देखा जाता है लेकिन सफीपुर तहसील की अगर बात की जाए तो सबसे बड़ी भाषा तहसील है।

 भ्रष्ट तहसील अधिकारी कार्रवाई के नाम पर हमेशा पल्ले झाड़ते नजर आते हैं क्योंकि यहां तो मधुमक्खियों छत्ते लगे हैं जब चाहते हैं यहाँ आराम से निचोड लेते हैं और पूर्ति विभाग में बैठने वाले उनके मुंह की अगर बात की जाए तो इतना लग चुका है कि पता नहीं कितने आए और कितने चले गए लेकिन कुछ बाबूजी तो ऐसे हैं कि कंप्यूटर पर बैठे बैठे हैं सारा सिस्टम खत्म कर देते हैं और कोई भी उनकी कुर्सी को हिला नहीं पाता है इसीलिए कोटे संचालन व प्रधान दबंगई से काम करते हैं क्योंकि जांच के नाम पर तो उनकी हर फाइल ठंडे बस्ते में दफन हो जाती है।

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