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उन्नाव जिले में अक्सर सत्ताधारीओ का रहता है बोलबाला।


उन्नाव जिला ब्यूरो अवधेश कुमार की रिपोर्ट
 

ग्राम सचिव व प्रधान की सांठगांठ से ग्राम वासियों को नाली, खड़ंजा लगवाने का झांसा देकर ग्राम सचिव व प्रधान की मिली भगत से निकाल लिए जाते हैं लाखों रुपए ।

फतेहपुर 84 क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम पंचायत इस्माइलपुर नौगंवा के पंचायत भवन का हाल-जर्जर पड़ा ग्राम सभा में पंचायत भवन कैसे बहा रहा है गरीब जनता के किस्मत के आंसू प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में बैठे अधिकारियों का उन्नाव जिले के बहुचर्चित ब्लॉक फतेहपुर 84 कई ग्राम सभाएं हैं अक्सर जनता को ग्राम पंचायतों में हुए शौचालय, नाली, खड़ंजा, पंचायत भवन, जैसे आदि कार्यों में ग्राम सचिव ग्राम प्रधान की मिली भगत से घोटाले में गमन में मिलता रहा जांच के नाम पर झूठा आश्वासन ।

ग्राम विकास की आड़ में उन्नाव जिले की अक्सर ग्राम पंचायतों में फैली रही भ्रष्टाचार की जड़ शौचालय निर्माण में ग्राम प्रधान की धांधली लाभार्थियों को नहीं मिला धन और ग्राम प्रधानों को मिलता मिलता है कुछ ग्राम विकास अधिकारियों का संरक्षण । 

क्योंकि प्रधानों द्वारा किया गया था अक्सर ग्राम पंचायतों में कई कई लाखों से लेकर करोड़ों का घोटाला।

लेकिन ग्राम सभा में जांच को लेकर उच्च अधिकारियों के आंखों पर पड़ जाता है काला पट्टा। शौचालय से लेकर पंचायत भवन तक ग्राम प्रधान व सचिव जमकर कर रहे धांधली । गरीबों शौचालयों का लाभ नहीं मिल रहा है शौचालय का लाभ मिलना तो दूर रहा वर्षों से जर्जर पड़े पंचायत भवन की मरम्मत हो जाए । केंद्र और यूपी की सरकार स्वच्छ भारत मिशन अभियान के शख्स लाख दावे कर रही है ।

 किंतु यहां योजना भ्रष्टाचार के चलते धरातल पर दम तोड़ चुकी है । बता दें जनपद उन्नाव में अक्सर हमेशा में चर्चित रहने वाला ब्लॉक फतेहपुर 84 की ग्राम सभा नौगांवा इस्माइलपुर में जहां पर शौचालयों का निर्माण कागजों पर तो पूरा करवाया गया है 

किंतु धरातल पर अधिकांश अधूरे पड़े हैं किसी में सीट नहीं तो किसी के दरवाजे आदि नहीं है जो हाल इस्माइलपुर नौगंवा ग्राम पंचायत में शौचालय का वही हाल देखने को मिला पंचायत भवन में कागज पर पंचायत भवन तो पूरा है पर धरातल पर अधिकांश अधूरा है ।

 अब देखना यह होगा खबर छपने के बाद उन्नाव मुख्य विकास अधिकारी ग्राम सचिव और ग्राम प्रधान की मिलीभगत से क्या कार्यवाही करते हैं।

ग्राम पंचायत में पड़े अधूरे पंचायत भवन और शौचालय जैसी कई योजनाएं अधूरी है । या फिर ग्राम सचिव और ग्राम प्रधान की मिली भगत से मुख्य विकास अधिकारी की खानापूर्ति कर दी जाएगी । कार्यवाही के नाम पर कार्यवाही या फिर एक रद्दी की टोकरी में कैद हो जाएगी ।

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