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उन्नाव पूर्व पच्वंसी के कुछ गांव के वही प्रधान के समय में कराए गए विकास कार्यों में भारी अनियमितता की हो जांच


उन्नाव जिला ब्यूरो चीफ अवधेश कुमार की रिपोर्ट

जहां चुनाव से पहले कुछ प्रधानों को वंचित करने के बाद की जा रही हो लेकिन लोकायुक्त के निर्देश पर पूर्व में सीडीओ उन्नाव पूजा प्रजापति  ने जांच के आदेश भी दिए थे लेकिन उनके बदलते ही जांच भी ठंडे बस्ते में दफन ।

जिला उन्नाव की  ग्राम पंचामत मे पूर्व के समय में कराए गए विकास कार्यों में भारी अनियमितता की लोकायुक्त के निर्देश पर डीएम ने अधिनस्थ अधिकारियों को जांच के आदेश दिए थे। मामले में जांच के दौरान लीपापोती किए जाने की शिकायत पुनः

लोकायुक्त से करते हुए ग्रामीण ने पत्र लिखकर जनहित में दोबारा जांच कराने की मांग की है। बताते चलें कि विकास खण्ड f 84 कुजगवा,उस्मानपुर पट्टी,शूकरबाद,सैता,पिखी, गड़ाई, भुलभूलियाखेड़ा,,नौगंवा एवं दबौली के ग्राम पंचायत  में विकास कार्यों से जुड़े हुए जिम्मेदार अधिकारियों व तत्कालीन ग्राम प्रधान के वही दूसरी विकास खंड बांगरमऊ, सुरेसनी,माऊ, आलमपुर रेतवा, हारयाबर,अतरधानी,मुस्तफाबाद,फतेपुर खालसा,फतेपुर हमजा,भाटिया पुर,व अन्य कई गांव के प्रधान कार्यकाल में गांव के विकास के नाम जमकर धन का बंदरबांट किया गय। गांव के शिकायतकर्ता ने मामले मे लोकायुक्त उत्तर प्रदेश को शिकायती पत्र लिखकर कर दोषियों के खिलाफ जाँच एवं कार्यवाही की मांग की थी। लोकायुक्त के निर्देश पर डीएम ने मुख्य विकास अधिकारी डॉक्टर प्रजापति को जाँच सौंपी । मामले में सीडीओ ने त्रिस्तरीय टीम का गठन कर मामले की जांच कराई। लेकिन टीम के अधिकारियों ने आधी अधूरी जांच करके अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली, जबकि क्षेत्रवासियों कहना यह है कि मैं भूमिका प्रधान के साथ विकासखंड में बैठे वीडियो व मंत्री भी उतना ही पत्ती का हिस्सेदार होता है जितना प्रधान होता है इसीलिए जांच के नाम पर दांत के पास पाठ खो जाता है क्योंकि जब तक ऊपर से वीडियो व मंत्री के खिलाफ कोई जांच नहीं होगी तब तक गरीब असहाय लोगों को न्याय मिल पाना नामुमकिन है।

 जांच के दौरान मनरेगा व प्रांतीय खंड के अभियंता लोक निर्माण विभाग ने 9 व 10 नवंबर को जांच अधिकारियों ने ग्राम पंचायत का दौरा किया निर्माण के नाम पर 28 लाख एक हज़ार पांच सौ छब्बीस रुपए की अनियमितता पाई गई थी लेकिन आरोपी के द्वारा दिए गए प्रार्थना पत्र पर उल्लिखित आख्या रिपोर्ट लगाते  में गड़बड़ी को दरकिनार कर मात्र 52000 रुपए की ही अनियमितता दर्शाई गई।

बताया जाता है कि जांच के दौरान पशु सेड में नव निर्माण करके जांच अधिकारियों को प्रभावित कर दिया। जिसका खुलासा जांच रिपोर्ट के उस बिंदु पर मिलता है, जहां पर कार्य शुरू कराए जाने व कार्य पूर्ण कराए जाने का कोई बोर्ड मौजूद नहीं था। ग्राम पंचायत सचिव व तत्कालीन ग्राम प्रधान द्वारा विकास कार्यों में की गई गड़बड़ी को छुपाने के लिए पुनर्निर्माण कराया जाना यह सिद्ध करता है। समूचे ग्राम पंचायत गुनौरा में जितने इंडिया मार्का नल नहीं लगाए गए हैं, उससे कहीं ज्यादा संख्या में नल के मरम्मत व रिबोर के नाम पर धन निकाल लिया वही उससे ज्यादा और हुए ग्राम विकास में शौचालय जहां चार सौ थे तो वहां डेढ़ सौ ही वह भी मानक के अधीन पाए गए और जिन गांव में आज तक पूरे शौचालय का ब्यौरा मांग दिया जाए तो आधे भी  मिल पाना मुश्किल होगा जहां यह बोला जाता हो कि शिकायतकर्ता की शिकायत गुप्त रखी जाएगी लेकिन ब्लॉक में बैठे व तहसीलों में बैठे कर्मचारी पहले ही प्रधान को आगाह कर कर उस पीड़ित पर कार्रवाई हो जाती है ताकि आगे के लिए कोई और पीड़ित बोलने के लिए तैयार ना होया।

शिकायतकर्ता  ने बताया कि वर्ष 2017 में  घर से तालाब तक लगभग 55 मीटर नाली का निर्माण कराया गया जिस पर तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव द्वारा तीन बार अलग-अलग नामों को दर्शाकर तीन बार में लगभग सवा तीन लाख रुपए खर्च होना दर्शाया गया है। जांच अधिकारियों ने शिकायतकर्ता की शिकायत को दरकिनार कर नाली निर्माण में दोषमुक्त करार दिया है। वही प्राथमिक विद्यालय व पंचायती भवनों में के कायाकल्प में गड़बड़ी, रूप के नाम पर तालाब में पानी भरने के नाम धन निकासी की गड़बड़ी, तालाब खुदाई, जीर्णोद्धार, बंधा निर्माण, इंटरलॉकिंग, सड़क पर मिट्टी पटाई, अपात्रों को आवास योजना का लाभ दिया जाना, अपात्रों को पशु शेड योजना का लाभ दिया जाना,अन्य कई बिंदुओं पर बिना जांच किए ही मामले को इतश्री कर दिया गया। इन्हीं बिंदुओं को लेकर शिकायतकर्ता ने लोकायुक्त से पुनः जांच कराने की मांग की है।

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