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हिन्दी हमारी राष्ट्रभाषा ही नहीं हमारी स्मिता और पहचान भी है: सिंह


हाजीपुर
(वैशाली)हिंदी केवल हमारी राष्ट्रभाषा ही नही यह हमारे देश की स्मिता और हमारी पहचान भी है।हिंदी मेरे देश में ही नही अपितु देश के बाहर भी बोली और समझी जाती है।जरूरत है इसे समृद्ध और वैश्विक बनाने की ताकि दुनिया के विभिन्न देशों में रहने वाले हिंदी भाषी लोग यह समझें कि उनके देश की अपनी गरिमा भी है।उक्त बातें आज जिला के गोरौल प्रखंड अंतर्गत मधुरापुर गांव स्थित स्वर्गीय रहती देवी रामसुन्दर सिंह निकेतन में हिंदी मंच द्वार विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर आयोजित विचार गोष्ठी को संबोधित करते हुए शिक्षाविद वशिष्ठ प्रसाद सिंह ने कही।निकेतन के अध्यक्ष श्याम किशोर की अध्यक्षता में आयोजित एवं रत्नेश कुमार के संचालन में संचालित विचार गोष्ठी को सम्बोधित करते उच्च माध्यमिक विद्यालय शंभूपुर कोआरी के हिन्दी शिक्षक अनिल कुमार ने कहा कि हमें यह जानकर प्रसन्नता होगी कि विश्व के अन्य देशों के विभिन्न विश्वविद्यालयों में भी हिन्दी का अध्ययन और अध्यापन का कार्य किया और कराया जाता है।प्रत्येक साल दस जनवरी को विश्व हिन्दी दिवस मनाकर हिन्दी को समृद्ध बनाने का यह पुनीत कार्य बहुत ही प्रशंसनीय है और हम गौरवान्वित हैं अपने देश में ऐसे दिवस मनाकर।मौके पर छात्र आकाश राज द्वारा भगवानपुर प्रखंड की बान्थू मध्य विद्यालय की शिक्षिका एवं उभरती हुई कवियत्री प्रियंका कुमारी की कविता ''हिंदी मैं समझती हूँ",हिन्दी मैं समझती हूँ,राष्ट्रभाषा हिंदी मेरी,हिंदी की संस्कृति अपनाती,काश हमारी यह भाषा अंतरराष्ट्रीय हो जाती ''नामक कविता का सस्वर पाठ किया। जिसकी सराहना लोगों ने मुक्त कंठ से की।मौके पर सेवानिवृत्त शिक्षक शिवचंद्र सिह,दिनेश पटेल,मिथिलेश कुमार,देशबंधु कुमार,ललन कुमार, सत्यनारायण सिंह,अरविंद कुमार, रवींद्र कुमार अवनीश कुमार,प्रभात कुमार राजन,अभिषेक कुमार,रवि कुमार,कुन्दन कुमार आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

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