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प्रेरणा के प्रखर पुंज को,शत बार हमारा चरण वंदन



विभूतिपुर छोटन कुमार की रिपोर्ट // 
विभूतिपुर प्रखंड के किशनपुर टभका गाँव में चर्चित साहित्यिक व सांस्कृतिक संस्था द्वारा आयोजित " अभिव्यक्ति " द्वारा आयोजित कविवर उपेन्द्र चौधरी मधुप स्मृति काव्यांजलि सह श्रद्धांजलि समारोह का जीवंत आयोजन हुआ।अध्यक्षता प्रख्यात पत्रकार एवं साहित्यकार चाँदमुसाफ़िर ने की।संचालन प्रो0 पी. के.झा और कुशेश्वर प्रसाद सिंह ने किया।मुख्य अतिथि के रूप में काव्य पाठ का आरंभ करते हुए सुप्रसिद्ध कवि राजा राम महतो ने जब पढ़ा-"आदमी कुछ ऐसा हो चला है आजकल,

बदन जैसे रूह से अलग हुआ है आजकल,

कुछ न सूझता जब आगे,गहरा अंधियारा,

समाज को राह दिखाने,बढ़े साहित्य न्यारा" तो श्रोताओं ने तालियाँ बजाकर इसकी स्वीकृति दी। विशिष्ट अतिथि के रूप में अपनी रचना को पढ़ते हुए जब स्वयं प्रभा ने पढ़ा-" मैं चली रण सेज पिया जी " तो दर्शकों की वाहवाही ने नारीशक्ति को प्रबलित किया। बेगूसराय के युवा कवि मिंटू कुमार झा की रचना " खबर इशारों पर छपती है अब ऐसे अखबार बहुत हैं " ने आज की कड़वी सच्चाई की पड़त खोल दी। प्रो0 शशिभूषण चौधरी की रचना-आप चले गये, गया एक जमाना" तो लोगों की आँखें नम हो गयीं। अध्यक्षीय काव्यपाठ करते हुए चाँद मुसाफिर ने पढ़ा-

"किसी की बेबसी पर हँसना नहीं सीखा, आस्तीन का साँप बनकर दोस्तों को डसना नहीं सीखा" के साथ लोग अपनी संवेदना महसूस करते दिखे।युवा कवि शरदेन्दु श्यामल ने लोगों को गुदगुदाया- दो चार दिनों की मुलाकातों में,उस पहले प्यार का एहसास कहाँ से आएगा।अन्य रचनाकारों में राम विलास प्रवासी, अनिल झा,गोविंद कुमार राय,सुमन कुमार झा,प्रमोदानंद चौधरी,देवेंद्र चौधरी, मनोज कुमार चौधरी, विनय कुमार झा सहित कई लोगों की उपस्थिति रही।

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