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सब दान से बडा दान कन्या दान होला, ऊ नसीब वाला होला जेकरा ऐगो बेटी होला


बिक्रमगंज
(रोहतास)। स्थानीय शहर के मां आस्कामिनी के दरबार में चल रहे शिव महापुराण कथा के पांचवें दिन मां पार्वती और भगवान शिव के विवाह के रस्म की झांकी निकाली गई । उस दौरान सभी श्रद्धालुओं ने मां पार्वती एवं भगवान शिव के विवाह में उल्लास व आस्था के साथ भाग लिए । साथ ही उस दौरान पूरा माहौल भक्तिमय से भाव विभोर हो उठा । उस वक्त प्रवचन स्थल पर सभी महिला श्रद्धालुओं ने जयकारा के साथ विवाह गीत गाया । जिससे पूरा माहौल भक्तिमय हो गया । मानों उस वक्त धराधाम पर मां पार्वती एवं भगवान भोलेनाथ की शादी में ऐसा दृश्य परिलक्षित हो रहा था कि सभी देवी - देवता , गंधर्व एवं अप्सराएं आकर विवाह में स्वयं शामिल हुए हो ।
आपको बता दें कि मां आस्कामिनी के स्थापना दिवस के पावन अवसर पर इस वर्ष प्रयागराज से राष्ट्रीय कथावाचक ब्रजकिशोर चंद्र शास्त्री महाराज पधारे हुए है । जिनके मुखारविंद से प्रतिदिन भक्त शिव महापुराण कथा का रसपान करा रहे है । कथा का वर्णन करते हुए पूज्य श्री शास्त्री जी महाराज ने शंकर व पार्वती के विवाह पर प्रकाश डाला । उन्होंने कहा कि वैसे शास्त्रों में विवाह आठ प्रकार का होता है परंतु आठ में ब्रह्म विवाह श्रेष्ठ माना जाता है । ब्रह्म विवाह का मतलब होता है कि अग्नि सूर्य परिवार ब्रह्मांमण देवताओं के सन्मुख विवाह करना । वैसे भगवान शंकर का मां पार्वती के साथ परिवार इष्ट मित्र सब के सहयोग से विवाह हुआ । महाराज पर्वतराज हिमाचल ने अपनी पुत्री का कन्यादान किया । श्री शास्त्री ने कहा कि शास्त्रों के अनुसार ब्रह्म विवाह करने वालों का जीवन सुखमय रहता है । महारानी मैना और महाराज हिमाचल अपने सभी भाई बंधुओं के सम्मुख मां पार्वती का वैदिक विधि विधान के साथ कन्यादान किया । इस संसार में कन्यादान से बड़ा कोई दान नहीं होता । धरती पर यह पवित्र कार्य उन्हें करने का अवसर प्राप्त होता है जिसे परमात्मा ने बेटी संतान दिया है 
। वैसे तो हम अपने मानव जीवन में अगर रहते हैं और हम मनुष्य हैं एक पुत्री का कन्यादान तो हम सभी को करना चाहिए यह पवित्र कार्य कई प्रकार का भावनाओं के साथ परमात्मा के लिए भी मार्ग बनाता है । उन्होंने चौपाई के माध्यम से बताया कि पुत्री पवित्र किए कुल दोउ - पुत्री दो कूल वंस का मिलन कराती है , पुत्री है संसार का मूल अगर बेटी नहीं होगी तो बेटे कहां से होंगे । अभी तक पुत्र से ज्यादा माता-पिता का सेवा करने का कार्य बेटी में ज्यादा देखने को मिलता है । कन्यादान के साथ में शिव विवाह में भूत प्रेत , पिशाच - हक ने डाकिनी की झांकी आकर्षण का केंद्र रहा ।हजारों नर नारी कन्यादान से लेकर सिंदूरदान के मगल गीत और भजन सुना सुना कर मंत्रमुग्ध कर दिए ।नाचते गाते हुए बरात मां आस्कामिनी प्रांगण पहुंचा । मां आस्कामिनी का पूरा प्रांगण भक्तों की जयकारा से गूंज रहा था । सभी लोग फूल माला लेकर बराती का स्वागत किया । बारातियों के लिए कई प्रकार के मिष्ठान की व्यवस्था मंदिर कमेटी के द्वारा द्वारा किया गया था । मौके पर हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही ।

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