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स्त्रियों के प्रति प्रेम , सद्गुण व आदर्श की भावना रखना चाहिए : वृज किशोर चंद्र शास्त्री


बिक्रमगंज
(रोहतास)। शिव महापुराण कथा के चौथे दिन मां पार्वती के जन्म उत्सव को लेकर भव्य झांकी निकाली गई । इस पावन अवसर पर मां पार्वती के जन्म उत्सव में हजारों नर - नारी शामिल हुए । चौथे दिन का कथा सुनाते हुए प्रयाग के पावन धरती से आए हुए राष्ट्रीय कथावाचक वृज किशोर चंद्र शास्त्री महाराज ने कहा कि भारत स्त्री प्रधान देश है । इस भारत भूमि पर स्त्रियों को देवी कहा जाता है । संसार में सुख व शांति की अगर हम इच्छा रखते हैं तो स्त्रियों के प्रति हमारे मन में आदर्श की भावना होनी चाहिए । नारी जातियों के लिए या समूल्य मानव जाति के लिए मां पार्वती का जन्म बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है । मां पार्वती स्त्रियों को स्त्री धर्म को एक तरफ शिक्षा देने का काम किया है । मां पार्वती ने कहां है कि स्त्री का एक ही धर्म है कि सब कुछ छोड़ पति को ही परमेश्वर समझे । पति में माता - पिता , गुरु , देवता व अपने इष्ट यानी सबका ध्यान करें । पति सेवा से ही  सभी नारी परम मोक्ष को प्राप्त कर सकती है । परंतु आज कलिकाल में यह बात देखने को बहुत कम मिल रहा है कि शास्त्र कहता है कि जहां स्त्रियों की पूजा होती है , वही देवता का वास होता है । परंतु हर घर मे अक्सर कलह होता दिखाई दे रहा है । इसके पीछे सिर्फ एक ही कारण है कि हम अपने सनातन और वैदिक परंपरा को भूलते जा रहे हैं । हमें अपने सत्य सनातन धर्म को समझना सबसे जरूरी है । उन्होंने कहा कि घर को लक्ष्मी नहीं कहा जाता है , स्त्री को लक्ष्मी कहा जाता है । अगर नारी चाहे तो घर को स्वर्ग बना सकती है और नारी चाहे तो घर को नरक बना सकती है । उन्होंने कहा कि स्त्री लक्ष्मी , सरस्वती और समय से काली और दुर्गा का भी रूप ले लेती है ।  कथा के दौरान कहा कि तारकासुर नामक दैत्य जब चारों तरफ देवताओं के सभी प्रमुख स्थानों पर अपना अधिकार जमा लिया था । तो सारे देवता ब्रह्मा के पास जाते हैं , ब्रह्मा भगवान नारायण के पास जाते हैं 

। श्री शास्त्री ने कहा कि देवताओं में मंत्रणा होती है कि तारकासुर का बध तभी संभव है जब पुनः शक्ति का जन्म होगा । तो सभी देव लोग मां की आराधना के लिए पवित्र धाम हिमालय जाते हैं । हिमालय पर सभी देव मां से प्रार्थना करते हैं । उन्होंने नवरात्रि के बारे में बताते हुए कहा कि श्रद्धा भक्ति के साथ राजा हिमाचल व रानी मैना नवरात्रि का व्रत करती है । तब जाकर आकाशवाणी होती है कि हम आपके पूजा से प्रसन्न है और आपके घर में हम जन्म लेंगे । आकाशवाणी की बातें को सुनकर चारों तरफ आनंद ही आनंद हो जाता है और आगे चलकर वही आदिशक्ति राजा हिमाचल के यहां पुत्री बन के आती है । जन्म के उपरांत मां से दर्शन करने के लिए बड़े-बड़े ऋषि- महर्षि और सभी देवताओं का समूह पहुंचता है । उन्होंने कहा कि भगवान औरत के द्वारा मां पार्वती की हस्त रेखाओं को देखा जाता है और शंकर के प्रति प्रेम की भावना दर्शाते हुए भगवान नारद ने बालपन में ही मां पार्वती को सब कुछ बता दिया । पार्वती का जब जन्म का चर्चा राक्षस गण सुनते हैं तो उनका मन घबराने लगता है और जो आगे चलकर इसी चैत्र नवरात्रि में नवमी के दिन शुक्रवार का दिन मृगशिरा नक्षत्र में रात्रि को 12:00 बजे मां पार्वती का जन्म हो जाता है । जीवन में अगर किसी को कुछ प्राप्त करना है तो शिव शक्ति की आराधना ही करना पड़ता है । चाहे विद्या तंत्र हो अविद्या तंत्र हो साधना हो या तंत्र क्रिया हो सब का मूल रूप शक्ति से होकर जाता है । मानव जाति को भी स्त्रियों के प्रति, प्रेम , सद्गुण व आदर्श की भावना रखना चाहिए ।काफी संख्या में भक्तजनों ने भाव विभोर होकर कथा का श्रवण किया । जो कि मां की केझांकी आकर्षण का केंद्र रहा । अस्कामिनी मां का प्रांगण जयकारों से गूंज रहा था । प्रवचन स्थल पर यज्ञ समिति के तरफ से हलवा व पेड़ा प्रसाद की व्यवस्था श्रद्धालुओं के लिए की गई थी । मौके पर समाजसेवी घनश्याम सिंह , मनोज सिह ,  राज कुमार सिंह , पंकज बाबा,  अभिमन्यु कुमार सिंह , गुड्डू तिवारी , आचार्य उपेंद्र पांडेय , बिहारी जी  , मंदिर प्रबंधक गया सिंह , पंकज , गोलू , कामेश्वर सिंह , विशाल सिंह , सूरज राज के साथ-साथ हजारों की संख्या में सभी श्रद्धालु लोग उपस्थित रहे ।

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