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अब महज औपचारिकता से ज्यादा कुछ नहीं बचा, धरती को बचाने का आशय है


सीतामढ़ी से दीपक पटेल की रिपोर्ट

डुमरा।वैसे तो हमें हर दिन को पृथ्वी दिवस मानकर उसके बचाने के लिए कुछ न कुछ करते रहना चाहिए जैसे मैं करता हूं। लेकिन कोई अपने व्यस्त जीवन से यदि पृथ्वी दिवस के दिन ही थोड़ा बहुत योगदान दे दे तो धरती के कर्ज को कम कर सकता है। पौधे वाले गुरुजी ट्री मैन सुजीत कुमार कहते हैं कि दुनिया भर में हर आम पी 0साल 22 अप्रैल को मनाया जाने वाला पृथ्वी दिवस अब महज औपचारिकता से ज्यादा कुछ नहीं बचा। धरती को बचाने का आशय है इसकी रक्षा के लिए पहल करना। लेकिन इसके लिए किसी एक दिन को ही माध्यम बनाया जाए यह उचित नहीं।

                    मानवता के इतिहास में ऐसा पहली बार है कि हमें उस धरती को बचाने के लिए बात करनी पड़ रही है जिसने इंसान की हजारों पीढ़ियों को पोषित किया है। धरती को सुरक्षित रखना और पोषित करना, खुद के लिए एक अच्छे जीवन की आकांक्षा करना है क्योंकि एक अच्छी धरती के बिना कोई जीवन अच्छा नहीं हो सकता है। पृथ्वी दिवस की पूर्व संध्या पर पौधे वाले गुरुजी ट्री मैन सुजीत कुमार ने डुमरा के आसपास के कई निजी शिक्षण संस्थाओं में जाकर विद्यार्थियों को धरती मां को बचाने के लिए पेड़-पौधे रूपी हरियाली की चादर से ढकना होगा।

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