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अख्तियारपुर सेहान स्थित चतुर्मुखी विष्णु मंदिर का इतिहास है निराला


वैशाली:
चेहराकलां।चेहराकलां प्रखंड अंतर्गत अख्तियारपुर सेहान स्थित प्राचीन विष्णु मंदिर  में चतुर्भुजी विष्णु भगवान की पूजा अर्चना तो प्रत्येक दिन होता ही रहता है। चैत मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के शुभ मुहूर्त में रविवार को अहले सुबह में ध्वजारोहण के लिए काफी संख्या श्रद्धालु ध्वजा के साथ मंदिर परिसर में पहुंच कर भगवान विष्णु की पुजा अर्चना के साथ धुमधाम जन्मोत्सव मनाया। इस मौके पर चार दिवसीय मेला का आयोजन करने की परम्परा आज भी कायम है।  स्थानीय लोगों के मुताबिक मंदिर का निर्माण सुर्यमुखी ईट से निर्माताओं ने बहुत ही बारीकी से मंदिर का निर्माण करते हुए मंदिर में इस तरह से प्रतिमा स्थापित किया जो प्रतिमा,शाक्य एवं बौद्ध कलाकृतियों से मिला जुला है। वास्तुकला की अदभूत मिशाल के साथ इस प्राचिन विष्णु मंदिर का निर्माण किया गया है। मंदिर की स्थापना कब हुई इसके संबंध में स्पष्ट मंतव्य नहीं मिल पा रहा है। पौराणिक कथाओं में इस मंदिर का निर्माण पालकालीन युग की मानी जा रही है। मंदिर प्रतीक एवं स्वरूप देखने से यह प्रतित होता है की यह सर्व धर्म स्थली रही होगी । मंदिर के उपरी भाग में नौ गुम्बज है। मंदिर गुम्बज पर भगवान बुध्द की प्रतिमा अंकित है जो पीले रंग में स्पष्ट तौर पर आज भी दिखाई दे रही है।

मंदिर में स्थापित चार भुजाओं वाले भगवान विष्णु की प्रतिमा में शंख ,चक्र,गदा एवं पद्म है।मंदिर में मां लक्ष्मी एवं मां सरस्वती की प्रतिमा विराजमान हैं।जो धन व ज्ञान के द्योतक है। मंदिर के दक्षिणी भाग में आज भी बड़ा तालाब है जो पुष्पकरणी के रुप में माना जाता है ।कहा जाता है की भगवान विष्णु की मूर्ति इसी पुष्पकरणी से निकली थी।बाद में चलकर एक भव्य मंदिर निर्माण कर मूर्ति को स्थापित किया गया होगा ।उसी वक्त से भगवान विष्णु की दुर्लभ मूर्ति के स्वरूप को  प्रत्येक दिन पुजा अर्चना करने के साथ चैत मास शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से चार दिवसीय ध्वजारोहण के साथ विशेष पुजा अर्चना बड़े ही धूमधाम से मनाने की परम्परा बनी जो आज भी कायम है ।

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