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रोटी, कपड़ा और मकान के बाद सबसे अहम है शिक्षा: वशिष्ठ प्रसाद


हाजीपुर
(वैशाली)रोटी, कपड़ा और मकान के बाद यदि किसी व्यक्ति को एक और अहम चीज की जरूरत है तो वह है शिक्षा।इसके बिना व्यक्ति पशु के समान है।इससे जीवन का अंधकार मिटता है और व्यक्ति इसके उजाले में जीवन के जरुरी अवसर ढूंढ लेते हैं।हम यदि शिक्षित हैं तो हमारा दायित्व है समाज के वैसे हर व्यक्ति को शिक्षित बनाना जो इसके बिना आज भी जिल्लत की जिन्दगी जीने को मजबूर हैं।आंकड़े बताते हैं कि आज भी हम पूर्णतः शिक्षित नही है।पेट की आग बुझाने की खातिर अब भी लोग बहुत दूर जाकर महज कुछ सौ रुपयों की मासिक पगार पर मजदूरी करते ,ईंट भट्ठो में स्त्री-पुरुष काम करके जीवन की गाड़ी को ठेलते हैं।शहरों में आज भी अनपढ़-गंवार लोगों का मजाक उड़ाया जाता है और उनका शोषण किया जाता है।उक्त बातें बीते शनिवार को गोरौल प्रखंड के विशुनपुर बान्दे ग्राम स्थित ज्ञानोदय विद्या मंदिर के सभागार में आयोजित शिक्षा जागरूकता और शिक्षक सम्मान समारोह के मौके पर बोलते हुए शिक्षाविद वशिष्ठ प्रसाद सिंह ने कही।निदेशक राजकिशोर राय द्वारा व्यवस्थित व महेंद्र राय की अध्यक्षता और सत्येंद्र कुमार के संचालन में संचालित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए हिन्दी विषय के शिक्षक अनिल कुमार ने कविता की एक पंक्ति उद्धृत करते हुए कहा कि 'कट गई पूंछ,नखदंत झरे, पशुता का झरना बाकी है।बाहर-बाहर तन संवर चुका, अभी मन का संवरना बाकी है।" शिक्षा के प्रति जागरूक होने का हमारा सरोकार सिर्फ और सिर्फ पेट की भूख मिटाने, सिर्फ अपनी जरूरतें पूरी करने से नही अपितु हमारा सरोकार जनहित और समाजहित से होना चाहिए।आज दुनिया विश्व युद्ध की आग में झुलसने की स्थिति में है।क्या यह शिक्षा को लेकर हमें जागरूक होने का प्रमाण है। शिक्षा की जागरूकता से हमारा अभिप्राय व्यक्ति को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर अपनी जरूरतें पूरी करने के साथ-साथ समाज और राष्ट्र के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान सुनिश्चित करना।मौके पर उपस्थित बीआरपी धर्मेन्द्र कुमार ने कहा कि आज जरूरत है धरातल पर काम करके दिखाने की।उन्होंने प्रखंड के सोन्धो ग्राम में महादलित टोला में जगजगी केन्द्र पर शिक्षा का अलख जगाते दो सेवकों का जिक्र करते हुए कहा कि हमें शिक्षा के प्रति जागरूक होने का प्रमाण वहां से लेना चाहिए।हिन्दी साहित्य में उत्कृष्ट सेवा के लिए उच्च माध्यमिक विद्यालय, शंभूपुर कोआरी के हिन्दी शिक्षक अनिल कुमार को शॉल ओढ़ाकर तथा बुके देकर सम्मानित किया गया था।इनके साथ अन्य शिक्षकों को भी शॉल व बुके देकर सम्मानित किया गया था।समर्पण हाजीपुर की ओर से लोगों को डायरियां देकर सम्मानित किया गया।समारोह को संबोधित करने वालों में प्रोफेसर दिलीप कुमार पाल,डॉक्टर सुनीता कुमारी,बीरचंद्र प्रसाद आभूषण,पूर्व प्रमुख सुबोध राय,चन्द्रशेखर पटेल, विशुनदेव ठाकुर,सोनेलाल सिंह, निशांत कुमार,शशिभूषण कुमार सिंह व रविभूषण कुमार आदि प्रमुख हैं।

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