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नौगढ़ के कोइलरवा में चल रहा है श्री राम कथा


नौगढ़ चंदौली संवाददाता लक्ष्मीकांत विश्वकर्मा की रिपोर्ट

नौगढ़। कोइलरवा मंदिर में चल रहे कथा के तीसरे दिन मानस किंकर श्री मुनि जी महाराज ने नारद का प्रसंग सुनाया। कहा कि भगवान की भक्ति भवसागर से पार भी करती है। अहंकार युक्त भक्ति जीव का पतन भी कर देती है।

नारद भगवान विष्णु के परम भक्त थे। भगवान की भक्ति करने के लिए हिमालय की कंदरा में जाकर एक झरने के किनारे बैठ गए। 

नारद की भक्ति से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी कहीं मेरा इंद्रासन देव ऋषि नारद को ना दे दे। इसलिए इंद्र ने देव ऋषि नारद की समाधि को तोड़ने का प्रयत्न किया। 


भगवान विष्णु ने उन्हें बंदर का रूप दे दिया क्योंकि देव ऋषि नारद का कल्याण चाहते थे। भगवान विष्णु कन्या स्वयंवर में उस कन्या ने किसी अन्य राजा की गले में माला डाल दी तो भगवान के पार्षद जय और विजय इस पर हंसने लगे देव ऋषि नारद ने जय और विजय को श्राप दे दिया। और भगवान विष्णु को भी श्राप दे दिया कि तुमने जो आज मेरा बंदर का मुख बनाया है यही आगे चलकर तुम्हारी रक्षा करेगा। भगवान विष्णु ने अपना असली रूप दिखाया तो देव ऋषि नारद का मुंह दूर हुआ। देव ऋषि नारद को दुख भी हुआ कि मैंने भगवान को श्राप दे दिया। 

इस मौके पर से ,कृष्णमुरारी,मौलाना यादव ,सुरेश , चिरौजी प्रसाद, पप्पू, रामजी,, मुन्नीलाल, प्रमहंस, संजय उपस्थित रहे

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