Breaking News

विश्व पृथ्वी दिवस पर देश व प्रदेश वासियों को हार्दिक शुभकामनाएं




सोनो जमुई संवाददाता चंद्रदेव बरनवाल कि रिपोर्ट  // पृथ्वी दिवस की इस विशेष शुभ अवसर पर धरती माता को किसी भी प्रकार के प्रदूषण से मुक्त करने हेतु प्रयास करें , और हम सब मिलकर भावी पीढ़ियों के लिए हरी-भरी व सुंदर धरती बनाने का संकल्प करें । पृथ्वी के प्राकृतिक वातावरण के प्रति संवेदनशील बनने का संकल्प लें तथा उसके प्रति संवेदनशील बनने की प्रतिबद्धता दोहराएं ताकि आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित पृथ्वी देने की जिम्मेदारी निभाया जा सके । उक्त बातें सोनो बाजार के समाज सेवी सह डॉ सुबोध कुमार गुप्ता ने कही । उन्होंने कहा कि पृथ्वी सभी जीवों के लिए जीवन दायिनी है । जीवन जीने के लिए जिन प्राकृतिक संसाधनों की जरूरत एक पेड़ , एक जानवर या फिर एक इंसान को होती है , पृथ्वी वह सब हमें प्रदान करती है । हालांकि वक्त के साथ सभी जरूरी प्राकृतिक संसाधनों का दोहन इस कदर हो रहा है कि समय से पहले की सभी संसाधन खत्म हो सकते हैं । ऐसे में मनुष्य के लिए पृथ्वी पर जीवित रहना मुश्किल हो जाएगा । इसी मुश्किल को हल करने के लिए प्रकृति प्रदत्त चीजों का संरक्षण करने की आवश्यकता है । इस आवश्यकता के बारे में सभी को जागरूक करने के उद्देश्य से हर साल 22 अप्रैल को ' पृथ्वी दिवस ' मनाया जाता है । उन्होंने आगे कहा कि अर्थ डे को मनाने की शुरुआत 1970 में हुई थी । सबसे पहले अमेरिकी सीनेटर गेलॉर्ड नेल्सन ने पर्यावरण की शिक्षा के तौर पर इस दिन की शुरुआत की थी । एक साल पहले 1969 में कैलिफोर्निया के सांता बारबरा में तेल रिसाव की वजह से त्रासदी हो गई थी । उक्त हादसे में कई लोग आहत हुए और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में काम करने का फैसला लिया गया । इसके बाद नेल्सन के आह्वान पर 22 अप्रैल को लगभग दो करोड़ अमेरिकियों ने पृथ्वी दिवस के पहले आयोजन में हिस्सा लिया था । पृथ्वी दिवस या अर्थ डे शब्द को सबसे पहले जूलियन कोनिग दुनिया के सामने लाए थे । उनका जन्मदिन 22 अप्रैल को होता था । इसलिए पर्यावरण संरक्षण से जुड़े आंदोलन की शुरुआत 22 अप्रैल को अपने जन्म के दिन करते हुए उन्हें इसे अर्थ डे का नाम दिया गया । उनका मानना था कि अर्थ डे और बर्थडे एक अच्छा ताल मिलाता है । इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि पृथ्वी दिवस को लेकर देश और दुनिया में जागरूकता का भारी अभाव है । सामाजिक या राजनीतिक दोनों ही स्तर पर इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाए जाते । कुछ पर्यावरण प्रेमी अपने स्तर पर कोशिश करते रहे हैं , लेकिन यह किसी एक व्यक्ति , संस्था या समाज की चिंता तक सीमित विषय नहीं होना चाहिए ।सभी को इसमें कुछ न कुछ आहुति देनी पड़ेगी तभी बात बनेगी ।

कोई टिप्पणी नहीं

Type you comments here!