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बुद्ध पूर्णिमा पर विशेष


डॉ. सुबोध कुमार गुप्ता

सोनो जमुई संवाददाता चंद्रदेव बरनवाल की रिपोर्ट

शांति और अहिंसा का मार्ग प्रशस्त करने वाले , दया और प्रेम के सागर भगवान बुद्ध को नमन एवं सोनो प्रखंड वासियों को बुद्ध पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए सोनो बाजार निवासी डॉ सुबोध कुमार गुप्ता ने कहा कि सम्पूर्ण विश्व को शांति एवं करुणा तथा मैत्री का संदेश देने वाले महाकारुणिक तथागत सम्यक संबुद्ध के जन्म , ज्ञान प्राप्ति तथा महापरिनिर्वाण की घटना को बुद्ध पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है । भगवान बुद्ध ने अपनी शिक्षा और ज्ञान से संपूर्ण विश्व को सत्य , त्याग , अहिंसा व मानवता का संदेश दिया । उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध का त्यागमय जीवन , उनके उत्कृष्ट विचार एवं मानवतापूर्ण शिक्षा हम सभी को अनन्तकाल तक प्रेरित करती रहेगी । पूरी दुनिया जिन्‍हें भगवान बुद्ध या महात्‍मा बुद्ध के नाम से जानती और मानती है , वास्‍तव में उनका नाम सिद्धार्थ गौतम था । बचपन में इस नाम से पुकारे जाने वाले सिद्धार्थ बाद में वो भगवान बुद्ध कहलाए । उन्‍होंने ही बौद्ध धर्म की तमाम प्रथाओं , परंपराओं और इसके मुताबिक आदर्श जीवन को परिभाषित किया । हर साल बैशाख माह की पूर्णिमा को भगवान गौतम बुद्ध का जन्‍मोत्‍सव मनाया जाता है । भगवान बुद्ध का जन्म वैशाख मास की पूर्णिमा को हुआ था । इस पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा कहा जाता है । देश भर में आज बुद्ध पूर्णिमा का पर्व मनाया जा रहा है । बुद्ध पूर्णिमा बौद्ध अनुयायियों के साथ-साथ हिंदुओं के लिये भी खास पर्व है । हिन्‍दू धर्म में गौतम बुद्ध को भगवान श्री विष्णु का नौवां अवतार माना जाता है । बुद्ध के जीवनकाल को 563-483 ई० पू० के मध्य माना गया है । नेपाल के लुम्बिनी नामक स्थान को बुद्ध का जन्म स्थान माना गया है । गौतम बुद्ध की मृत्यु उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में 80 वर्ष की आयु में हुई थी । बुद्ध पूर्णिमा का संबंध बुद्ध के साथ केवल जन्म भर का नहीं है बल्कि इसी पूर्णिमा तिथि को वर्षों वन में भटकने व कठोर तपस्या करने के पश्चात बोधगया में बोधिवृक्ष के नीचे बुद्ध को सत्य का ज्ञान हुआ । कह सकते हैं उन्हें बुद्धत्व की प्राप्ति भी वैशाख पूर्णिमा को हुई । इसके पश्चात महात्मा बुद्ध ने अपने ज्ञान के प्रकाश से पूरी दुनिया में एक नई रोशनी पैदा की और वैशाख पूर्णिमा के दिन ही कुशीनगर में उनका महापरिनिर्वाण हुआ । कुल मिलाकर जन्म , सत्य का ज्ञान और महापरिनिर्वाण के लिये भगवान गौतम बुद्ध को एक ही दिन यानी वैशाख पूर्णिमा के दिन ही हुआ । बुद्ध ने भारत की पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कराई । आज गर्व के साथ कह सकते हैं कि मैं बुद्ध की धरती से हूँ ।

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