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चमकी बुखार से बचाओ के लिए दी गई ट्रेनिंग


वैशाली: महुआ
पीएचसी में ग्रामीण चिकित्सकों को (मस्तिष्क ज्वर) चमकी बुखार से बचाव की जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि गांव के बच्चों को अगर चमकी बुखार के लक्षण दिखता है तो उसे तुरंत अनुमंडल अस्पताल भेजवाएं। इसके लिए उन्हें रोग से संबंधित एक एक जानकारी दी गई। रोगों के लक्षण के बारे में भी बताया गया।

यहां अस्पताल प्रभारी डॉ कमलेश कुमार के निर्देशन में स्वास्थ्य प्रबंधक प्रकाश कुमार के नेतृत्व में डॉ राय दुर्गेश नंदन ने रोग के लक्षण के बारे में बताया। उन्होंने चमकी बुखार के कारण और उनके लक्षण को बताते हुए ग्रामीण चिकित्सकों को इसपर विशेष रुचि लेने को कहा। उन्होंने कहा कि बच्चों में अगर चमकी बुखार की कोई भी लक्षण दिखता है तो उसे अनुमंडल अस्पताल भेजने में कोई परहेज नहीं करें। यहां उनके इसके लिए विशेष वार्ड बनाए गए हैं। जहां हर प्रकार की व्यवस्था रखी गई है। इलाज के लिए पहुंचने पर वाहन की खर्च अस्पताल प्रशासन द्वारा वहन किया जाएगा। चमकी बुखार के लक्षण के बारे में बताया कि सर दर्द तेज बुखार, अर्ध चेतन अवस्था में मरीज का होना, बच्चे का बेहोश हो जाना, शरीर में चमकी होना या हाथ पैर में थरथराहट होना, बच्चों का शारीरिक एवं मानसिक संतुलन ठीक नहीं होना यह लक्षण बताया गया। उन्होंने यह भी बताया कि तेज बुखार होने पर ताजा पानी से पोछे और पंखा से हवा दें, परासीटामोल की गोली मरीज को डॉक्टर की सलाह पर दें, ओआरएस का घोल बनाकर पिलाएं, मरीज को बाएं या दाएं करवट में ही सुलाएं, बच्चे को बदन से कपड़ा हटा ले और गर्दन को सीधा रखें, रात में सुलाते समय बच्चों को भरपेट खाना खिलाए और उसे गुड़ या कोई मीठा आहार जरूर दें। इस समय तिखी धूप में बच्चों को नहीं जाने दे, टीकोलें आदि से दूर रखें। उन्हें बताया गया कि गांव के लोग सीधे-साधे होते हैं। उन्हें बच्चों में इस तरह के लक्षण आने पर सही मशवरा देना जरूरी है। इस मौके पर डॉ शशि भूषण, स्वास्थ्य कर्मी संतोष कुमार आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे।

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