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बरगद और पीपल वृक्ष के लगाए 108 फेरे


वैशाली:
सोमवती अमावस्या और वट सावित्री व्रत एक साथ होने को लेकर सुहागिनों का सैलाब विभिन्न जगहों पर उमड़ पड़ा। पूरे साज सज्जा के साथ परिधान में सजी महिलाएं बरगद और पीपल के 108 फिरे लगाकर सौभाग्य की रक्षा के लिए मन्नत मांगी। साथ ही पंडितों से कथा श्रवन कर उन्हें यथासंभव दान भी दिए पर्व को लेकर सुहागिनों में भक्ति के साथ खासा उत्साह और उमंग देखा गया। सोमवार को अमावस्या पड़ने से पर्व का विशेष योग हुआ। 

महुआ के वाया नदी तट काली घाट पर सुहागिनों का सैलाब उमड़ पड़ा। यहां बरगद और पीपल के 108 फेरे लगाकर अखंड सौभाग्य के साथ धन, वैभव, रूप, यश, संतान प्राप्ति के लिए प्रार्थना की। पर्व पर सुहागिनों ने पूरे परिधान में सज सबर कर पूजन के लिए पहुंची। बरगद और पीपल के फेरे लगाने के साथ नाक से लेकर पूरे मांग को सिंदूर से भरे। खासकर इस पर्व पर एक दूसरे को सिंदूर लगाकर आशीर्वचन लेने की परंपरा रही। सुहागिनों ने भूमि पूजन के साथ बड़ों के पैर छुए और पति की सेवा की। उन्होंने बरगद वृक्ष के साथ पति को पंखे झेले और हमेशा शीतलता छांव प्रदान करने के लिए प्रार्थना की। इस पर्व को करने के लिए नई नवेली दुल्हन उत्साह में निकली। व्रतियों ने पंडितों से सावित्री सत्यवान के अलावा शिव पर्वती की कथा सुनी और उन्हें यथासंभव दान दिए। यहां काली घाट पर पूजन कर रही प्रियंका, वंदना, माया, रेणु, पूजा, अभिलाषा, चांदनी, सुप्रिया, नीलू, अंजलि, सोनी, श्वेता, चांदनी, अभिलाषा, प्रिया, सुजाता, नीतू आदि ने बताया कि यह लोक पर्व सुहागिनों के लिए अति फलदायक है। इस दिन सावित्री ने अपने पति सत्यवान का जीवनदान पाई थी। ज्येष्ठ अमावस्या और पूर्णिमा को बरगद वृक्ष के 108 फेरे के साथ पूजन कर सौभाग्य की प्राप्ति के लिए मन्नत मांगी जाती है। इस बार सोमवार को अमावस्या होने से पर्व का काफी महत्व रहा है। उन्होंने बाल में बरगद के पत्ते लगाकर व्रत का पूजन किया। यहां महावीर मंदिर पुराना बाजार, फुलवरिया पोखर, कढनियां, पकड़ी, चांदसराय, सरसई सरोवर, हुसैनीपुर, कड़ियों, बरियारपुर, सेहान, रामपुर, लक्ष्मीपुर, पहाड़पुर, कन्हौली सहित जिले के कोने कोने में सुहागिनों की भीड़ वृक्ष पूजन के लिए उमड़ी। उन्होंने बरगद और पीपल वृक्षों के फेरे लगाकर सौभाग्य प्राप्ति की मन्नत के साथ विश्व कल्याण की कामना की। इस मौके पर उन्होंने पर्यावरण की रक्षा का भी संकल्प लिया। पर्व को लेकर सुहागने अहले सुबह से ही सज सबरकर पूजन स्थल पर जाने लगी। जिससे पूरे क्षेत्र में चहल-पहल बनी रही। पर्व को लेकर महिलाओं की उमरी भीड़ के कारण विभिन्न जगहों पर मेला सा नजारा रहा।

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