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भगवान नरसिंहदेव की वार्षिक पूजा के अवसर पर सैकड़ो की संख्या में श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना किया



रिपोर्ट नवीन कुमार सिंह सहदेई बुजुर्ग // महनार -  महनार प्रखंड के चमरहरा गांव के ग्राम देवता भगवान नरसिंहदेव की वार्षिक पूजा के अवसर पर सैकड़ो की संख्या में श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना किया।बताया गया कि प्रत्येक वर्ष चैत्र माह के चतुर्थी तिथि को वार्षिक पूजा का आयोजन श्रद्धा और उल्लास के साथ किया जाता है।श्रद्धा के साथ हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान नरसिंहदेव की पूजा अर्चना की।कई लोगों ने अपने बच्चों का मुंडन संस्कार कर गेंहू के रोट,दूध एवं भांग युक्त प्रसाद चढ़ाया।बताया गया कि चमरहरा के भगवान नरसिंहदेव विष्णु भगवान के दस अवतारों में से एक हैं और भगवान नरसिंहदेव चमरहरा ग्रामदेवता के रूप में पूजित हैं।जितना पुराना इस गांव का इतिहास है, उससे कम नहीं है इस मंदिर की पूजा की परम्परा।करीब डेढ़ सौ वर्ष पूर्व से इस गांव की ऐतिहासिक मान्यताएं चली आ रही हैं।गांव की देवी दुर्गा भी उन्ही दिनों से पूजित हैं।जिन दिनों से नरसिंहदेव।भगवती और विष्णु की पूजा की समानांतर परम्परा चमरहरा गांव में देखने को मिलती है जो अन्यत्र नहीं है।विष्णु के जिन दसो अवतारों में ‘गीतगोविंद’ की रचना है उनमें से एक चमरहरा के नरसिंहदेव है।जिनके प्रति लोगों में इतनी आस्था है की गांव के सभी बच्चे के जन्म के बाद का पहला मुंडन मंदिर परिसर में ही होता है।यदि किसी कारणवश मंदिर परिसर में मुंडन नहीं हो पाया तो अन्यत्र होनेवाले मुंडन के अवसर पर नरसिंहदेव के नाम का पहले लट काट दी जाति है।नरसिंहदेव की चित्र मंदिर की दीवार पर अवस्य बनी हुई है,लेकिन उनके चित्र की जगह उनके नाम के पिंड की पूजा होती है।उनके पिंड के अतिरिक्त उनके मंदिर में कोई अन्य पिंड नहीं है।पूरे गांव के घर-घर में कुल देवी बन्नी की पिंड है।चमरहरा के नरसिंहदेव के प्रति परम्परा आधारित इस पूजा में पवित्रता और विश्वाश का व्यापक आधार है।यहां मनौतियां मानने वालो की मंशा जरूर पूरी होती है।भगवान नरसिंहदेव की सलाना पुजा वैसाख माह की चतुर्दशी तिथि को होनेवाले पूजा में गेहुं की मोटे आटें से बना रोट और दूध व भांग मिला शरवत प्रसाद के रूप में चढ़ाई जाति है।प्रसाद बनाने वाले श्रद्धालु उपवास रख कर प्रसाद बनाते है और पूजा के अवसर पर गांव के अतिरिक्त दूर-दूर के लोग शामिल होकर आपसी द्वेष भूलकर नरसिंहदेव से अपनी मनोकामना पूर्ण होने कामना करते है।सांस्कृतिक कार्यक्रम के अतिरिक्त पारंपरिक गीत भी गाये जाते हैं।किसी भी मांगलिक अवसरों पर नरसिंहदेव की पूजा अनिवार्य रूप से ग्रामवासी  करते हैं।चमरहरा गांव के घाघरा नदी के किनारे बना नरसिंहदेव की मंदिर अपनी ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक परम्परा के लिये दूर-दूर तक प्रसिद्ध है।वार्षिकोत्सव पूजन समारोह में ग्राम विकास समिति के अध्यक्ष रामनरेश सिंह,सचिव चंद्रकेत सिंह,महनार व्यापार मंडल के अध्यक्ष धीरेंद्र कुमार सिंह उर्फ धीरुभाई,गुड्डू सिंह,रामयश सिंह,पंकज कुमार सिंह,ब्रजकिशोर सिंह,अमर कुमार सिंह आदि उपस्थित रहे।

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