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11 दिवसीय श्री श्री 1008 शत् चण्डी महायज्ञ के पांचवें दिन श्रद्धालुओं ने जगत के पालनहार श्री हरि की किया पूजा अर्चना


वैशाली:
सहदेई बुजुर्ग-सहदेई बुजुर्ग प्रखंड क्षेत्र के बिहजादी में चल रहे 11 दिवसीय श्री श्री 1008 शत् चण्डी महायज्ञ के पांचवें दिन श्रद्धालुओं ने जगत के पालनहार श्री हरि की पूजा अर्चना किया। महायज्ञ में सबसे ज्यादा भीड़ सुबह और शाम में देखने को मिल रही है। जिसमे महिलाओं की भीड़ अधिक जुट रही है । महायज्ञ में आने वाले श्रद्धालु यज्ञमंडप की परिक्रमा करने के बाद स्थापित किए गए 108 विभिन्न देवी देवताओं के प्रतिमा पर प्रसाद के रुप में मिश्री, बादाम और मकुंदाना चढ़ाकर पूजा अर्चना कर रहे है। साथ गांव, समाज और राष्ट्र के कल्याण के लिए कामना भी कर रहे है। महायज्ञ में उत्तर दिशा मुख्य द्वार पर 30 फीट उंचा हनुमान जी प्रतिमा स्थापित की गई है। वहीं यज्ञमंडप के पूरब दिशा में एक बड़ा सा खेत में समुद्र जैसा बनाया गया है और उसमे करीब तीन फिट तक पानी भड़ा हुआ है, इसके साथ उक्त समुद्र में जगत के पालनहार श्री विष्णु और मां लक्ष्मी की प्रतिमा शेषनाग के उपर बैठाया गया है, जो महायज्ञ में आकर्षक का केन्द्र बना हुआ है। लोग सभी देवी देवताओं को पूजा अर्चना करने में लगे हुए है। महायज्ञ में ऋषियों और आचार्यों के द्वारा किए जा रहे वैदिक मंत्रोच्चार से पूरा ईलाका भक्ति के रस में डूबा हुआ है। माने तो क्षेत्र में भक्ति की गंगा ही बह रही है। उधर रविवार को श्रद्धालुओं को पूजा अर्चना कराते हुए अयोध्या से आए हुए आचार्य रंजीत शास्त्री ने कहा कि जगत के पालन हार श्री हरि की कृपा जिन भक्तों को मिलती है, उनका जीवन धन्य हो जाता है। श्री हरि की भक्ति हर पाप और कष्ट से मुक्ति दिलाती है। नारायण का जाप करने वाले भक्त हर मुसीबत और विपदा से सुरक्षित रहते है। उन्होंने कहा कि संसार में जब सभी सहारे टूट जाते है तो अंत में श्री हरि नाम ही मनुष्य का एक मात्र सहारा बनता है। सुख का समय हो या दुख का समय प्रभु नाम का स्मरण करते रहे। जो लोग सदैव ईश्वर का स्मरण करते है, ईश्वर की भक्ति में लीन रहते है उन पर कभी कोई कष्ट नहीं आता है। साथ ही कहा कि कलियुग में मानव शरीर की क्षमता,युग प्रभाव को देखकर ही कहा गया है कि इस युग में लोग प्रभु भजन व भक्ति से ही ईश्वर को प्राप्त कर सकते है।

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