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सतत जीविकोपार्जन योजना से अधिक से अधिक लोगों को जोड़ा जाए: जिलाधिकारी


रिपोर्ट प्रभंजन कुमार मिश्रा

वैशाली: जिलाधिकारी श्री यशपाल मीणा के द्वारा वैशाली समाहरणालय सभागार में जीविका वैशाली के कार्यों के प्रगति की समीक्षा की गयी और डीपीएम जिविका को निदेश दिया गया कि वैशाली जिला में भी चनपटिया मॉडल की तरह एक फैक्ट्री तैयार करायें। जिलाधिकारी ने कहा कि यहाँ जो पाँच मॉडल सीएलएफ (संकुल स्तरीय संघ) बनाये गये हैं उनमें अगल-अलग चीजों के उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया जाय। ये उत्पाद सेनेटरी नेपकीन, हैन्डलूम केला का रेशा से निर्मित सामान, मधु, रेडीमेड कपड़े या कोई अलग तरह का उत्पाद हो सकता है। जिलाधिकारी ने कहा कि इसी में से किसी को विकसित कर चनपटिया मॉडल बनायें।

बैंक द्वारा जीविका समूहों को दिये जाने वाले ऋण की समीक्षा के क्रम में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय लिंकेज निर्धारित समय सीमा के भीतर करवाने का निदेश दिया गया ताकि अधिक से अधिक समूह अपना रोजगार बढ़ा सकें। एक बैंक सखी एक पंचायत के तर्ज पर अगले महिने तक सभी 278 प्रचायतों में बैंक सखी की नियुक्ति की जाय। एक जिला एक प्रखंड के आधार पर सभी 16 प्रखंडों में जिविकोपार्जन गतिविधि हेतु एक नया नवाचार प्रारंभ कराया जाय एवं सरकार की महत्वाकांक्षी सतत् जीविकोपार्जन योजना से योग्य लाभुकों को अधिक से अधिक संख्या में जोड़ा जाय। इसके लिए। सुदूरवर्ती क्षेत्र या नदी के किनारे रहने वाले लोगों को लक्षित किया जाय। सभी प्रखंडों में नये 40 से 50 परिवारों को जोड़ा जाय। इसमें विकास मित्र का सहयोग लिया जाय।

नीरा की समीक्षा के क्रम में डीपीएम जीविका ने बताया कि जिला में 3784 टैपर पंजीकृत किये गये है। कुल 173 नीरा विक्रय केन्द्र खोले गये हैं जिसमें सबसे अधिक महुआ में 22 केन्द्र है। अभी तक जिला में कुल 752027 लीटर नीरा की विक्री की गयी है। जिलाधिकारी के पुछने पर बताया गया कि एक सेल प्वाइंट से प्रतिदिन 10 से 20 लीटर नीरा की विक्री की जा रही है नीरा के मामले में यह जिला बिहार में दूसरे स्थान पर विद्यमान है।

पूर्व में जिला के 30 तलाबों में जीविका के माध्यम से मछली पालन करने का निदेश दिया गया था। बैठक में डीपीएम ने बताया कि बिदुपुर और लालगंज में कार्य प्रारंभ हो गया है परन्तु अभी 30 जगह कार्य प्रारंभ होना बाकी है। जिलाधिकारी के द्वारा जानकारी ली गयी कि यहाँ किस मछली की मांग ज्यादे है और उसके लिए मार्केट कैसे उपलब्ध होगा। डीपीएम ने बताया कि रेहू, कतला, ग्रास जैसी मछली की माँग ज्यादे है और जो उत्पादन होगा उसकी स्थानीय बाजार में ही खपत हो जाएगी। जिलाधिकारी ने इस इस कार्य को गति देने और मार्केट सर्वे कर लेने का निदेश दिया। डीपीएम जीविका ने बताया कि वैशाली जिला में 367370 दीदी, 31597 स्वयं सहायता ग्रूप है।

समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी के साथ उप विकास आयुक्त श्री चित्रगुप्त कुमार, डीपीएम जीविका, सभी बीपीएम एवं जीविका से जुड़े प्रोफेशनल्स उपस्थित थे।

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