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एसा कहां से लाएं कि तुझसा कहें जिसे, मनोज प्रियदर्शी की पहली पुण्यतिथि पर शत-शत नमन

लेखक डॉक्टर मोहम्मद कलीम अशरफ


वैशाली
जिले के महनार अनुमंडल के पूर्व एसडीओ मनोज प्रियदर्शी की आज पहली पुण्यतिथि है।10 जून 2021 को कोरोना से जंग हार कर चिर निद्रा में सदा के लिए सो गए।जिन की याद में पहली पुण्यतिथि पर शब्दों की पुष्प अर्पित कर भावपूर्ण श्रद्धांजलि कर नमन करते हैं।कुछ हस्तियां इतनी बड़ी होती है और उनकी सामाजिक,शैक्षणिक,धार्मिक एवं प्रशासनिक सेवाएं और कुर्बानियां इतनी ज्यादा होती है कि उन पर कुछ लिखना आसान नहीं होता ऐसे ही हस्तियों में से एक नाम निवर्तमान एसडीओ दिवंगत मनोज प्रियदर्शी का है।जो न सिर्फ अधिकारी बल्कि सामाजिक,शैक्षणिक,धार्मिक एवं मिलनसार व्यक्तित्व के धनी थे।छोटे बड़े सब की एक जैसे इज्जत व सम्मान करते थे।उन्होंने ने आजीवन समाज सेवा के क्षेत्र में अपनी महती भूमिका अदा की।महनार के एसडीएम रहे मनोज प्रियदर्शी ने पटना के पारस अस्पताल में आखिरी सांस ली थी।जब बिहार में जाते-जाते कोरोना संक्रमण अपने रूप दिखाया था।तब निवर्तमान अनुमंडल पदाधिकारी मनोज प्रियदर्शी का शुक्रवार की सुबह सुबह कोरोना संक्रमण से निधन हो गया था।वह पिछले कुछ दिनों से कोरोना से पीड़ित थे और उनका इलाज पटना के पारस अस्पताल में चल रहा था।महनार के निवर्तमान अनुमंडल पदाधिकारी मनोज प्रियदर्शी 29 मई 2021से अस्पताल में भर्ती थे।शुक्रवार दस जून को उन्होंने अंतिम सांस ली।उनके निधन से महनार अनुमंडल सहित पूरे जिले में प्रशासनिक पदाधिकारियों के साथ आम नागरिकों एवं जनप्रतिनिधियों के बीच शोक की लहर दौड़ गई थी। घटना की सूचना मिलते ही हर कोई स्तब्ध रह गया।मनोज प्रियदर्शी अगस्त 2018 में महनार में एसडीओ के पद पर पदस्थापित हुए थे।एसडीओ के रूप में महनार में उनकी दूसरी तैनाती थी।इसके पूर्व वह सिकहरना अनुमंडल में एसडीओ के पद पर कार्यरत थे।उससे पहले शिक्षक और फिर सचिवालय सहायक और अपर समाहर्ता भी रह चुके थे।सन् 2000से 2004 तक अपने जिला के मध्य विद्यालय में सहायक शिक्षक रहे।वह काफी के तेज़ तर्रार थे।उनका लक्ष्य था कि प्रशासनिक सेवा में जाए और वह मेहनत करते हुए सचिवालय सहायक के पद पर 2004 में पदस्थापित होकर 2010 तक रहे और अपनी मेहनत जारी रखा और 2015 में एसडीओ बने का ग़ौरव प्राप्त किया और 2015 से 2018 तक सिकरहना चम्पारण के एसडीओ हुए और फिर वहां से तबादला होकर 2018 में महनार में योगदान दिए जो मरते दम तक एसडीओ रहे।वह इस दुनिया से 10जून 2021को सदा के लिए चले गए मृत्यु सत्य है और शरीर नश्वर है। यह जानते हुए भी अपने सगे-संबंधियों मित्रों का जाने का दुःख होता है।मनोज प्रियदर्शी के आकस्मिक निधन से मुझे भी काफी दुःख हुआ।चुकी वह मुझे मित्र की तरह थे सुबह में Good morning कहते और मैसेज करते जो सदा के लिए बंद हो गया।वह दुनिया से विदा हो गए लेकिन उनकी याद बाकी रहेगी।हम पहली पुण्यतिथि पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि शत-शत नमन करते हुए अल्लाह से उनकी आत्मा को सुकून व शांति के लिए दुआ करते हैं।

बिछड़ा कुछ इस अदा से कि रुत ही बदल गई

एक शख्स सारे शहर को वीरान कर गया।

व्यवहार के कारण महनार के लोगों के लिए थे प्रिय

बताया गया कि 2010 बैच में 48 से 52 भी बीपीएससी संयुक्त प्रवेश परीक्षा में उन्होंने सफलता पाई थी। उसके बाद वह प्रशासनिक पदाधिकारी बने थे।अपने व्यवहार के कारण वह महनार के लोगों के प्रिय बन गए थे।मनोज प्रियदर्शी के निर्देशन में महनार में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला महनार महोत्सव ने नई ऊंचाइयों को प्राप्त किया था।महनार महोत्सव को सरकारी दर्जा दिलवाने में उनकी भूमिका भी महत्वपूर्ण थी।

नेक दिल इंसान के रूप में जाने जाते थे मनोज

महनार में विकास कार्य को गति देने का भी कार्य किया था।लोगों के अनुसार अनुमंडल पदाधिकारी मनोज प्रियदर्शी का निधन अत्यंत दुःखद। लोगों ने कहा कि एक संवेदनशील एवं विनम्र पदाधिकारी तथा नेक दिल इंसान के रूप में महनारवासी मनोज प्रियदर्शी को हमेशा याद रखेंगे।मनोज प्रियदर्शी अपने पीछे पत्नी रंजना और दो पुत्र जिन में शाश्वत और मयंक शेखर छोड़ गए हैं।पत्नी रंजना कुमारी की अनुकम्पा पर सचिवालय सहायक के पद पर नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है।मनोज प्रियदर्शी की शख्सियत एक साया दार फल दार और मजबूत दरख़्त जैसा था वह गिर गया।

रहने को सदा दहर में आता नहीं कोई 

तुम जैसे गए ऐसे भी जाता नहीं कोई

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