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मुसलमानों को अपनी समस्याओं का समाधान दारुल कजा से करना चाहिए :अमीर ए शरीयत




                        मुसलमान सहाबा का जीवन अपनाएं : नायब अमीर ए शरीयत


हाजीपुर(वैशाली) जिले के लालगंज स्थित मदरसा फिरदौस उल उलूम में दारुल कजा शाख का अमीर ए शरीयत हजरत मौलाना अहमद फैसल वली रहमानी,नायब अमीर ए शरीयत हजरत मौलाना शमशाद रहमानी व दीगर उलेमा ए कराम,दानिश्वरान की मौजूदगी में कयाम अमल में आया। इस अवसर पर आयोजित आम सभा को संबोधित करते हुए अमीर ए शरीयत हजरत मौलाना अहमद फैसल वली रहमानी ने कहा कि दारुल कजा पूरे बिहार में स्थापित किया जाएगा ताकि मुसलमान कम लागत और कम समय में अपने मामले को हल करा सकेंगे।इससे कोर्ट कचहरी में भी बोझ कम होगा।उन्होंने कहा कि दारुल कजा से 70% मामले दो से तीन महीने में हल हो जाते हैं।जबकि कोर्ट कचहरी में सालों लग जाते हैं फिर भी इंसाफ नहीं मिलता है।जो साहब ए इमान हैं या नहीं वह दारूल कजा में आकर इंसाफ पायें।इस्लाम में सभी को इंसाफ दी जाती है।किसी के साथ ना इंसाफी नहीं होता।उन्होंने कहा कि जहां जहां दारुल कजा के मौके पर इजलास हो या दीगर दीनी इजलास हो तो वहां पर आम मुसलमानों को को भी आमंत्रित कर उपस्थिति को यकीनी बनाया जाए ताकि वह लोग भी दीन को समझ सकें और अपने मामलात,अखलाक,किरदार को सही कर सकें।दीन से दूरी के सबब आज हम सभी बेचैन व परेशान हैं।जो लोग कलमा तैयब(ला इला ह इल लल्लाहू..)पढ़ लिया वह उम्मत कभी मुन्तशिर नहीं होंगे।कलमा की बुनियाद पर सभी मुसलमान एक हैं।समान एकता बनाए रखें और शरिया कानून के दायरे में रहें।जब समाज में आपसी कलह,आक्रोश होता है तो समाज से शांति चली जाती है।उन्होंने कहा कि सहाबा के दरम्यान भी जब तनाजा हुआ करता था तो वह नबी करीम(मोहम्मद साहब)के पास अपना मामला ले जाते और हल कराते।इसी तरह हम मुसलमान हर मसले हल कराने के लिए काजी ए शरीयत के पास पहुंचे।चुंकि उलेमा अंब्या के वारिस हैं और वह नबी करीम(मोहम्मद साहब)के हिदायत व फरमान के मुताबिक ही सुलह,तस्फीया और फैसला करेंगे।नायब अमीर ए शरीयत हजरत मौलाना शमशाद रहमानी ने संबोधित कर कहा कि इस वक्त मौसम गर्म है।तपिश भी काफी है।इसी हरारत में देश का सियासी पारा चढ़ा हुआ है।कोई मदारिस को बंद कराना चाहता है।कोई मस्जिद की की खुदाई तो कोई ताजमहल का निरीक्षण करके उसे धार्मिक स्थल साबित करने की कोशिश कर रहा है।यह कानून-व्यवस्था के लिए खतरा है।एक दूसरे से नफरत की जा रही है।गांव गांव मे तफरीक बढ़ रही है।कहीं जात, मजहब,मस्लक को लेकर झगड़े में हम  अपना सुकून को खत्म कर रहे हैं।हमें कत्ल भी कर दिया जाता है तो मुसलमानों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगती।वह ख़ामोश तमाशाई बने रहते हैं।जबकि पैगंबर मोहम्मद साहब ने फ़रमाया कि मुसलमान आपस में भाई भाई है।चाहे किसी भी मुल्क में रहता हो।उसके दुःख दर्द में शामिल होना चाहिए था लेकिन ऐसा लोग नहीं करते हैं।इसकी वजह यह है कि हम अल्लाह से दूरी बना रखे हैं।कुरआन और हदीस को मानते हैं पर उस पर अमल नहीं करते।जिसकी वजह से इंतेशार है और हम हर जगह जलील व खार हो रहे हैं।हमें इज्ज़त नहीं मिल रही है वजह यह है कि हमारा अख्लाक,किरदार,हमारी हयात ए जिंदगी इस्लामी नहीं है।पहले सहाबा कराम किसी जगह और खित्ते में जाते थे तो उनके किरदार देखकर लोग इमान में दाखिल हो जाते थे।आज मुसलमान जहां जाते हैं तो उसे नफरत भरी निगाहों से देखा जाता है।उसकी वजह यह है कि हम इस्लामी अमल से दूर हैं।हम नबी करीम मोहम्मद साहब, खोलफा ए राशेदीन के तरीके व उस्व ए हस्ना पर अमल कर दुनिया और आखिरत में मकबूल बनें।किसी मामलात को लेकर झगड़े भी हों तो अपने मामलात को दारूल कजा में हल करायें।हरगिज,हरगिज कहीं दूसरी जगह न जाएं।कार्यक्रम से मुफ्ती मोहम्मद सनाउल होदा कासमी,मुफ्ती अंजार अहमद कासमी,मुफ्ती सईद-उर-रहमान कासमी,मौलाना दाऊद कासमी समेत दीगर उलेमा ए कराम ने भी खिताब किया।मदरसा फिरदौस उल उलूम के सदर शफी अहमद,सेक्रेटरी डॉक्टर फैज अहमद ने अमीर ए शरीयत, नायब अमीर ए शरीयत व इमारत ए शरीया की टीम को बुके देकर स्वागत किया।कार्यक्रम में मिस्बाह-उद-दीन अकरम ने अमीर ए शरीयत की शान ए आलिया में सपास नामा पढ़कर सुनाया और फिर उसे अमीर ए शरीयत के सुपुर्द किया।इसके बाद अमीर ए शरीयत ने वैशाली जिले के नामजद काजी मुफ्ती मोहम्मद शाहनवाज कासमी के सर पर दस्तार बांध सनद देकर हलफ दिलाया।कार्यक्रम की अध्यक्षता अमीर ए शरीयत हजरत मौलाना अहमद फैसल वली रहमानी व निजामत मौलाना आदिल फरीदी ने किया।कार्यक्रम में मौलाना नजीर अहमद नदवी,मुफ्ती तौकीर आलम कासमी,मौलाना नजरूल होदा कासमी,मौलाना फारूक हस्नी,मौलाना ताजुल होदा,मोहम्मद मोबीन,मोहम्मद अनीस,मास्टर मोहम्मद अजीमुद्दीन अंसारी,मास्टर शफी अहमद,मास्टर अब्दुल मन्नान,मास्टर शमीमुल होदा,मास्टर अताउल होदा,मोहम्मद इंतिखाब,डॉक्टर मोहम्मद कलीम अशरफ वैशालवी,पत्रकार मोहम्मद शाहनवाज अता आदि समेत अन्य महत्वपूर्ण गणमान्य लोग उपस्थित हुए और दुआ की।

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