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डॉल्फिन व गंगेय पक्षियों के संरक्षण व संवर्द्धन हेतु दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन


न्यूज डेस्क नालंदा:
भारतीय वन्यजीव संस्थान,बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी व भागलपुर विश्वविद्यालय द्वारा भागलपुर वन प्रमंडल के वनरक्षी, वन अधिकारियों के लिए नदी व गांगेय डॉल्फिन के अनुश्रवण, गणना और क्षमता निर्माण हेतु दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसका समापन आज 12 जुलाई को किया गया।

कार्यशाला में भारतीय वन्यजीव संस्थान,देहरादून से आए शोधकर्ता विजय प्रताप सिंह व शांतम ओझा ने संकटग्रस्त और राष्ट्रीय जलीय जीव गांगेय डॉल्फिन के पारिस्थितिकी, पर्यवास, खतरा व डॉल्फिन गणना के बारे विस्तृत जानकारी के साथ सर्वेक्षण पद्दति के बारे में फील्ड विक्रमशीला डॉल्फिन अभ्यारण्य में बताया । इस मौके पर विजय प्रताप ने बताया कि गंगा का डॉल्फिन मीठे जल में निवास करती है और अल्ट्रासोनिक ध्वनियों का उत्सर्जन करके अपने शिकार का पता लगाती है । 


इस कार्यशाला में भागलपुर विश्वविद्यालय के प्रो० सुनील चौधरी ने नदी पारितंत्र में गांगेय डॉल्फिन की महत्ता और विक्रमशीला डॉल्फिन अभ्यारण्य के जलीय जीवों संरक्षण हेतु प्रिशिक्षणार्थीयों को गुर बताए । कार्यशाला के दूसरे चरण में बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी के वैज्ञानिक सुब्रत देवता, शोधकर्ता खुशबू रानी ने नदी तटो और टापुओं पर प्रजनन करने वाले पक्षियों विविधता और उनके गणना एवं उनके अधिवास का अनुश्रवण के विभिन्न तरीको से रूबरू कराया । वैज्ञानिकों ने जानकारी दी कि इस डॉल्फिन अभ्यारण्य में 198 प्रजाति के पक्षी को अब तक देखे गए हैं जिसमे पाँच संकटग्रस्त,12 ख़तरे के नज़दीक हैं जिन्हें संरक्षण की सख़्त जरूरत है । 

भागलपुर वन प्रमंडल पदाधिकारी भरत चिंतापल्ली के प्रयास से इस कार्यशाला को सफलतापूर्वक आयोजित किया गया । कार्यशाला में 22 वनरक्षी और भागलपुर विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के साथ अन्य ने बढ़चढ़ कर भाग लिया ।

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