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सांप पर्यावरण व किसान मित्र हैं,न करें इसकी हत्या


न्यूज डेस्क नालंदा: 
सांप पारिस्थितिकी व खाद्य श्रृंखला के अहम कड़ी है। आमतौर पर जब कोई सांप दिख जाता है तो लोग खतनाक व जानकारी के अभाव में मौत के घाट उतार देते हैं,जबकि कई सांप विषहीन होते हैं। सांप के प्रति लोगों में जागरूकता लाने हेतु वर्ष 1967 में टेक्सास में पहलीबार आयोजन किया गया। वर्ष 1970 तक यह कार्यक्रम लोकप्रिय हो गया और 16 जुलाई के दिन सार्वजनिक रूप से कई संस्थाओं द्वारा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाने लगे,तबसे प्रत्येक वर्ष 16 जुलाई को "विश्व सर्प दिवस" मनाया जाने लगा।

सांपों से जुड़ी भ्रांतियां और तथ्य :


बीएनएचस से जुड़े वन्यजीव शोधकर्ता व सर्प विशेषज्ञ राहुल कुमार ने बताया कि समाज में ये मान्यता है कि सांप दूध पीते हैं,जबकि ये गलत है।साँप एक मांसाहारी प्राणी है,जो दूध पचा नहीं सकते हैं। 

धामन साँप के पूँछ में विष होता है, किसी भी विषैले साँप में विषग्रंथि ऊपरी जबड़े के पास होती है जो विषदंत से जुड़े होतें है।

दो मुहाँ सांप (रेड सैंड बोआ) के दोनों तरफ सर होतें है जबकि बोआ साँप का सर और पूँछ एक जैसे दिखते हैं । 


सांप बिन की धुन पर नाचते हैं, सांपों में श्रवण शक्ति कमजोर होती है, इन्हें सिर्फ कंपन महसूस होती है , साँप बिन की हरकत पर सिर्फ प्रतिक्रिया देते हैं जिसे नृत्य समझ बैठते हैं। 

सांप अपने साथी को मारनेवाले की तस्वीरे अपनी आँख की मदद से खींच लेता है और बदला लेता है। यह काल्पनिक और फ़िल्मी कहानियों में ही ऐसा हो सकता है क्योंकि सरीसृपों की स्मरण शक्ति हम इंसानों जैसी नही होती है ना वो बदला ले सकते हैं । 

धामन साँप कोबरा के साथ जोड़ी बनाते हैं और प्रजनन करते हैं, धामन साँप और कोबरा (गेहूंअन साँप) दो अलग अलग प्रजाति है, दोनो के व्यवहार अलग है, कोबरा धामन को भी खा लेते हैं इसलिए दोनो एक साथ नही रह सकते हैं न प्रजनन कर सकते हैं। 

शेषनाग अपने सर में नागमणि रखते हैं, यह अभी तक सिद्ध नही हो पाया है, यह एक मिथक है।

सुग्गा साँप इंसानो की आँखे निकाल लेते हैं, वाइन साँप झाड़ी व पेड़ो पर रहते हैं इसलिए इंसानो के सर पर ही वार कर पाते हैं इसलिए लोग समझते हैं की यह सिर्फ आँखों पर वार करते हैं।

विषहीन साखड़ (कॉमन वुल्फ स्नेक) को कई बार विषैला करैत समझ लिया जाता ठीक इसी तरह रसल्स वाईपर को कॉमन सैंड बोआ और छोटा अजगर समझ लिया जाता है । क्योंकि इनकी शारीरिक संरचना मितली जुलती हैं। 

धामन के पूँछ में विष होता है, धामन एक विषहीन सर्प है, विशैले साँपो के शरीर मे भी विष उनके सर में विष ग्रन्थि में होती है।

सर्पदंश से बचाब के उपाय

अंधेरे में टोर्च का इस्तेमाल करें, नंगे पैर जंगल-झाड़ी वाले जगहों पर न चलें। ईंट के ढेर, मलवा, कूड़ा-कचरा, अनाज या शाक-सब्जियों के अवशेष को निवास स्थान से दूर रखना चाहिए l

सोने के लिए ऊँची विस्तर और मच्छरदानी का प्रयोग करें, जमीन पर सोने से बचें ।

सातर्कता हीं है सर्पदंश से बचाव

साँप को देखते ही उससे दूरी बनाए रखें, मारने की या पकड़ने की कोशिश बिल्कुल भी न करें।

घर मे कोई विषैला सर्प दिखे तो उसके रेस्क्यू हेतु वन विभाग या किसी नजदीकी बचावकर्ता से संपर्क करें। अधिकांश सर्पदंश सर्प आत्मरक्षण के वजह से होता है, सर्पदंश एक दुर्घटना है अगर सावधानी वरती जाए तो सर्प दंश से बचा जा सकता है । पीड़ित व्यक्ति को शांत रहने की कोशिश करनी चाहिए इससे रक्त का संचरण तेजी से नहीं हो पाएगा और विष पूरे शरीर मे फैलने से बाधित होगा। कोबरा और करैत के दंश मे प्रभावित अंग को पट्टी से बांध देनी चाहिए साथ हीं झाड़-फूंक के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए और अविलम्ब चिकित्सक के पास जायें।

सर्पदंश से पीड़ित व्यक्ति को प्राथमिक उपचार केंद्र या अस्पताल मे जाना चाहियें जहां एंटी स्नेक वेनम उपलव्ध हो । 

साँप को पहचान सकें तो और बेहतर होगा, रंग-रूप, आकार, पीठ पर बने आकृति आदि । झाड़फूंक सर्पदंश का इलाज नही है ।

सैकड़ों लोग मरते है सर्प दंश से

सर्पदंश एक दुर्घटना है,थोड़ी सी सावधानी बरती जाए तो इस अप्रिय दुर्घटना से बचा जा सकता है। विश्व में प्रत्येक वर्ष 81,410 से 137,880 लोगो की सर्पदंश से मौत होती है । भारत में सांपों के काटने से प्रत्येक वर्ष करीब 50,000 लोगो की मौत हो जाती है,जबकि बिहार में यह आंकड़ा 4,500 तक पहुँच जाता है। सर्प दंश की एक हीं इलाज़ है,एंटी स्नेक वेनम जो सर्प विष से हीं बनता है। सांप का विष मौत के साथ ज़िन्दगी देने में भी सहायक है।

कैंसर रोग में सर्प विष है सहायक

सांपों के विष आज कैंसर जैसे घातक रोग के इलाज में सहायक सिद्ध हो रहा है । साइटोटोक्सिक विष हमारे शरीर मे कोशिकाओं और ऊतकों को नष्ट करता है, जो कैंसर के इलाज में मददगार साबित हो सकता है । 

सर्पदंश के इलाज में सर्पविष से बने एन्टी स्नेक वेनम का इस्तेमाल किया जाता है ।  एएसवी घोड़े के रक्त में सर्प विष मिलाकर तैयार किया जाता है । एएसवी रक्त में फैले विष को उदासीन कर देता है।

चिकित्सा जगत में प्रयोग होने वाली प्रतीक चिन्ह जिसमें एक छड़ी में दो लिपटे साँप होते हैं, जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि प्राचीन ग्रीस के निवासियों को पता था कि जहर में ढेरों औषधीय गुण होते हैं ।

कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जहां साँप का मांस खाते हैं । आवास क्षति और

चमड़ा उधोग हेतु शिकार के चलते इनके संख्या मे कमी आई है ।

बिग फोर हीं है घातक


आगे राहुल कुमार ने बताया कि हमारे देश में लगभग 300 प्रजाति के सांप पाए जाते हैं, जिसमें चार हीं ऐसे प्रजाति के हैं जिनका काटना घातक हो सकता है। इन चार सांपों को बिग फोर कहा जाता है। जिनमें कोबरा, करैत, रसल्स वाईपर और सॉ स्केल्ड शामिल हैं।

सांप पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अहम 

"गौरैया विहग फाउंडेशन" निदेशक राजीव रंजन पाण्डेय ने बताया कि सांप पारितंत्र का अहम हिस्सा है,क्योंकि यह कई तरह से जीव जैसे चूहें,पक्षियां, मेंढक,छिपकली आदि का शिकार करता है और बाज, स्टोर्क जैसे पक्षियों का आहार बनकर पारितंत्र में संतुलन बनाये रखता है । आहार श्रृंखला में सांप का महत्वपूर्ण योगदान है। सांप चूहों व पक्षियों को खाकर किसानों के फसलों की रक्षा करते हैं,इसलिए इन्हें किसानों का मित्र भी कहा गया है। हम अपने संस्था के माध्यम से आमलोगों में सांपों के प्रति जागरूकता फैलाकर संरक्षण का कार्य कर रहे हैं।

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