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हरितालिका तीज व्रत शुक्रवार 30 अगस्त को, इसी दिन चन्द्र पूजन:- आचार्य अभिषेक


मोतिहारी जिला ब्यूरो अमितेश कुमार रवि की रिपोर्ट

चकिया । हरितालिका तीज की महिमा को अपरंपार माना गया है। हिन्दू धर्म में विशेषकर सुहागिन महिलाओं के लिए इस पर्व का महात्म्य बहुत ज्यादा है। हरितालिका तीज व्रत हिंदू धर्म में मनाए जाने वाला एक प्रमुख व्रत है। भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि यानी 30 अगस्त को हरितालिका तीज मनाई जाएगी।भाद्रपद की शुक्ल तृतीया को हस्त नक्षत्र में भगवान शिव और माता पार्वती के पूजन का विशेष महत्व है। हरतालिका तीज व्रत कुमारी और सौभाग्यवती स्त्रियां करती हैं।हरितालिका तीज व्रत निराहार और निर्जला किया जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को सबसे पहले माता पार्वती ने भगवान शंकर को पति के रूप में पाने के लिए किया था। हरतालिका तीज व्रत करने से महिलाओं को सौभाग्य की प्राप्ति होती है। उक्त बातें चकिया प्रखंड परसौनी खेम स्थित महर्षि गौतम ज्योतिष परामर्श एवं अनुसंधान केन्द्र चम्पारण'काशी' के आचार्य अभिषेक कुमार दूबे ने बताया । हरियाली तीज और कजरी तीज की तरह ही हरितालिका तीज के दिन भी गौरी-शंकर की पूजा की जाती है। हरतालिका तीज का व्रत बेहद कठिन है। इस दिन महिलाएं 24 घंटे से भी अधिक समय तक निर्जला व्रत करती हैं । यही नहीं, रात के समय महिलाएं जागरण करती हैं और अगले दिन सुबह विधिवत्त पूजा-पाठ करने के बाद ही व्रत खोलती हैं। मान्यता है कि हरितालिका तीज का व्रत करने से सुहागिन महिला के पति की उम्र लंबी होती है, जबकि कुंवारी लड़कियों को मनचाहा वर मिलता है। यह व्रत मुख्य रूप से बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश में मनाया जाता है।चार तीजों में हरितालिका तीज का विशेष महत्व है। हरितालिका दो शब्दों से मिलकर बना है- हरत और आलिका। हरत का मतलब है 'अपहरण' और आलिका यानी 'सहेली'। प्राचीन मान्यता के अनुसार मां पार्वती की सहेली उन्हें घने जंगल में ले जाकर छिपा देती हैं ताकि उनके पिता भगवान विष्णु से उनका विवाह न करा पाएं। सुहागिन महिलाओं की हरितालिका तीज में गहरी आस्था है। महिलाएं अपने पति की दीर्घायु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। मान्यता है कि इस व्रत को करने से सुहागिन स्त्रियों को शिव-पार्वती अखंड सौभाग्य का वरदान देते हैं, वहीं कुंवारी लड़कियों को मनचाहे वर की प्राप्ति होती है। इसी दिन चन्द्र पूजन भी किया जाएगा । गणेशोत्सव 31 अगस्त से प्रारम्भ होगा । 1 सितम्बर के दिन ऋषिपञ्चमी का व्रत है ।

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