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डीएम के निर्देश के तीन महीने बाद भी कुआँ का नही हो सका जीर्णोद्धार

  • पीटीए ने कहा नही हो पाएंगे नजी कुआँ का काम
  • नही है प्रखंड में एक भी सरकारी कुआँ


वैशाली बिदुपुर संवाददाता अभिनय कुमार की रीपोर्ट 

वैशाली डीएम यशपाल मीणा द्वारा बिदुपुर प्रखंड के प्रथम दौरा के क्रम में पशुपालन अस्पताल कैम्पस स्थित बदहाल कुआँ को देखा गया कुँए की बदहाली देख कर डीएम ने बीडीओ सीओ मनरेगा पीओ को फटकार लगाते हुए जल जीवन हरियाली योजना से कुएं का जीर्णोद्धार कराने का निर्देश दिया था साथ ही साथ डीएम ने अन्य बदहाल कुओ की मरम्मती और जीर्णोद्धार कराने का भी आदेश दिया था हैरत की बात यह है कि लगभग तीन महीने बीत जाने के बाबजूद भी पशुपालन अस्पताल का वह कुआँ उसी बदहाली में आज भी है ना तो उस कुआँ की मरम्मती की गयी और ना ही उड़ाही हो पायी है।

 यही नही प्रखंड के कुओ में आधे प्रतिशत का भी जीर्णोद्धार कार्य शुरू नही किया गया मालूम हो कि पर्यावरण के बिगड़ते स्थिति को देख कर सरकार ने जल की किल्लत को दूर करने एव हरियाली बढ़ाने के उद्देश्य से जल जीवन हरियाली योजना शुरू की थी विभागीय कर्मियों की लापरवाही और शिथिलता के कारण इस दिशा में विकास का दर अत्यंत निम्न रहा है वरीय अधिकारियों के निर्देश के अनुपालन से कर्मी अक्सर कन्नी काटते रहते है मिली जानकारी के अनुसार प्रखंड में 2685 कुआँ है जो जियो टैग है मात्र एक अमेंर पंचायत में ही लगभग 117 कुआँ है मनरेगा योजना से नमूने के तौर पर प्रखंड में बीस कुआँ के जीर्णोद्धार करने का टारगेट फिक्स किया गया था।

 जिसमे 19 कुआँ में कार्य शुरू हुआ और अबतक 15 कुआँ का कार्य पूर्ण हो चुका है वही 15वी वित्त योजना से 24 में 18 पंचायतो में मात्र 16 कुआँ का जीर्णोद्धार किया गया है इस कार्य हेतु प्रखंड में तैनात चार पीटीए को छह छह पंचायत आवंटित है जिसमे पीटीए प्रीति कुमारी अबतक मात्र 09 कुँए का ही जीर्णोद्धार कर पायी है वही अंजली कुमारी मात्र 03 कुँए जबकि दिलसार 04 ही कुँए का जीर्णोद्धार एव मरम्मती कर पाए है पीटीए प्रतिमा कुमारी ने अपना आंकड़ा नही बताते हुए कहा की पंचायती राज विभाग के परियोजना निदेशक डॉ रंजीत कुमार सिंह के पत्रांक 158 दिनांक 02 मार्च 2022 के द्वारा जारी आदेश के अनुसार निजी कुओ की मरम्मती अब नही करनी है जबकि प्रखंड में एक भी सरकारी कुआँ नही है।

मालूम हो कि सरकार के बजट के अनुसार एक कुआँ के जीर्णोद्धार में एक लाख बीस हजार रुपये तक खर्च किया जा सकता है लेकिन विभागीय तकनीकी कर्मी द्वारा इसमें 60 हजार रुपये से लेकर 75 हजार रुपये तक ही एस्टीमेट बना कर काम किये गए है नतीजतन एक कुआँ के जीर्णोद्धार में जितना कार्य होना चाहिए उसमें बड़ी मात्रा में कटौती की जा रही है विकास के गति की इस रवैये से जल जीवन हरियाली के अंतर्गत इस योजना को बिदुपुर में पूरा करने में लगभग पचास वर्ष लग सकते है इस विषय पर पूछे जाने पर बीपीआरओ ज्योत्स्ना कुमारी ने बताया कि तत्काल एक सेमिनार में ब्यस्त है। 

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