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शिक्षक द्वारा मारपिट मे हुई एक छात्र की मौत के खिलाफ सोंपा गया ज्ञापन , किया गया फांसी दिलाने की मांग



रिपोर्ट चंद्रदेव बरनवाल

सोनो बिते दिनों राजस्थान के जालौर जिला अंतर्गत सायला तहसील स्थित सुराना गांव में निजी स्कूल के शिक्षक छैला सिंह के द्वारा तृतीय क्लास के नौ वर्षिय दलित छात्र इंद्र कुमार मैघवाल को बैरहमी से मारपीट किये जाने से उक्त छात्र की मौत इलाज के क्रम में अस्पताल में हो गई । छात्र का कसुर सिर्फ इतना ही था कि वे स्कूल में रखा मटके से पानी निकाल कर पी गया । मटके का पानी उक्त छात्र को इतना महंगा पड़ गया कि इसकी कीमत उसे अपनी जान देकर चुकानी पड़ी । शिक्षक द्वारा उक्त छात्र को पिटे जाने का एक विडियो तेजी से पुरे देश भर में फैल गई । इस घटना को लेकर डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर दलित‌ विकास समिति सोनो जमुई के द्वारा ना सिर्फ उक्त शिक्षक के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जुलूस निकाला गया , बल्कि प्रखंड मुख्यालय सोनो पहुंचकर प्रधानमंत्री माननीय नरेन्द्र मोदी , राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपदी मुर्मू , गृह मंत्री अमित शाह एवं राजस्थान के राज्यपाल महोदय के नाम एक एक ज्ञापन प्रखंड विकास पदाधिकारी सोनो को सौंपा गया । ज्ञापन में कहा गया है कि शिक्षक छेला सिंह के द्वारा विधालय में तृतीय क्लास के नौ वर्षिय दलित छात्र इंद्र कुमार मैघवाल को मटका से पानी पीने के आरोप में 

हृदय विदारक , घृणित , जघन्य एवं कुकृत्य कारनामे के साथ साथ बैरहमी से मारपीट किया गया , जिसकी मृत्यु 13 अगस्त 2022 को इलाज के क्रम में हो गई है । इस अमानवीय घटना ने पुरी मानवता को झकझोर कर रख दिया है । इस संवेदनहीन अपराधी शिक्षक छैला सिंह को फास्ट ट्रैक न्यायालय में स्पीडी ट्रायल सुनवाई कराते हुए अविलंब फांसी की सजा दिलाई जाए । आगे लिखा गया है कि एक तरफ जहां पुरे देश में आजादी के 75 वां अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है वहीं दूसरी तरफ जाति प्रथा एवं अश्यपृश्यता जेसी घृणित कुव्यवस्था के कारण निजि विद्यालय में मटका का पानी एक दलित छात्र के पी लेने से पानी अश्यपृश्य यानी छुत हो गया और इसके जुर्म में उस दलित छात्र इंद्र कुमार मैघवाल को विधालय के शिक्षक छैला सिंह ने कायरतापूर्ण मारपीट कर घायल कर दिया, जिसकी मृत्यु 13 अगस्त 2022 को अस्पताल में इलाज के क्रम में हो गई जिससे पुरा देश गमगीन हे । आगे निवेदित भरे लहजों में उस जघन्य अपराधी कायर शिक्षक छैला सिंह को फांसी की सजा दिलाने की मांग की गई है । चिंता जनक विषय यह है कि उस माता पिता के ऊपर क्या गुजर रही होगी जिन्होंने अपनी बुढेपन की सहारा का आस संजौये अपने बच्चों को शिक्षा ग्रहण करने स्कुल भेजते हैं , जहां पर शिक्षा देने वाले शिक्षक जिसे गुरुजी की संज्ञा दी जाती है, वही शिक्षक उन माता पिता के सपनों को चुर चुर कर देते हैं ।

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